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Madhya Pradesh-मध्यप्रदेश में राज्य सभा के एक और उप चुनाव की संभावना

मध्यप्रदेश से केंद्रीय राज्य मंत्री डॉ. एल. मुरुगन को बीजेपी ने तमिलनाडु की अविनाशी विधानसभा सीट से चुनाव मैदान में उतारा

एमपीपोस्ट, 22 अप्रैल, 2026, भोपाल। डॉ. एल मुरुगन वर्तमान में भारत सरकार के सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय और संसदीय कार्य मंत्रालय में राज्य मंत्री के रूप में कार्यरत हैं को भारतीय जनता पार्टी ने तमिलनाडु की अविनाशी (अनुसूचित जाति) आरक्षित विधानसभा सीट से पार्टी के प्रत्याशी के रूप में चुनाव मैदान में उतारा है। वर्तमान में वे मध्यप्रदेश से राज्य सभा सदस्य भी हैं, ऐसे में यदि वे विधानसभा चुनाव में विजयी होते हैं तो उसका असर मध्यप्रदेश की राजनीति पर भी सीधे पढ़ेगा।

संसदीय और संवैधानिक मामलों के जानकारों के अनुसार, यदि डॉ. मुरुगन अविनाशी विधानसभा सीट से जीत दर्ज करते हैं, तो उन्हें राज्य सभा की अथवा विधान सभा की दोनों में से एक की सदस्यता छोड़नी होगी।

भारतीय संविधान के प्रावधानों के तहत कोई भी व्यक्ति एक साथ संसद और राज्य विधानसभा—दोनों का सदस्य नहीं रह सकता। ऐसी स्थिति में मध्यप्रदेश से उनकी राज्य सभा सीट रिक्त होने की ज्यादा संभावना हैं, जिस पर उप चुनाव कराना पड़ेगा।

मुरुगन की जीत से मध्यप्रदेश में मचेगी सियासी हलचल: राज्य सभा के लिए फिर हो सकता है उप चुनाव:

तमिलनाडु विधानसभा चुनाव 2026 के लिए बिछी राजनीतिक बिसात में एक दिलचस्प मोड़ आ गया है। भारतीय जनता पार्टी ने केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण राज्य मंत्री डॉ. एल. मुरुगन को तमिलनाडु के तिरुपुर जिले की अविनाशी (सुरक्षित) सीट से चुनाव मैदान में उतारा है। तमिलनाडु विधानसभा चुनाव 2026 की सरगर्मियों के बीच एक ऐसी राजनीतिक स्थिति बन रही है जिसका सीधा असर मध्य प्रदेश की राजनीति पर पड़ेगा। यदि वे यह चुनाव जीतते हैं, तो उन्हें राज्य सभा य विधान सभा की किसी एक सदस्यता से इस्तीफा देना होगा, यदि वे राज्य सभा की सदस्यता से त्यागपत्र देते हैं तो मध्य प्रदेश में राज्य सभा की एक सीट खाली हो जाएगी।

मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने 21 अप्रैल को एल. मुरुगन को तमिलनाडु के तिरुपुर जिले की अविनाशी (सुरक्षित) सीट से उनके पक्ष में चुनाव प्रचार किया है।

डॉ. मुरुगन वर्तमान में मध्य प्रदेश से राज्य सभा सदस्य हैं, ऐसे में उनकी संभावित जीत मध्य प्रदेश के कोटे से राज्य सभा की एक सीट रिक्त कर देगी।

क्या है पूरा समीकरण?
डॉ. एल. मुरुगन 20 फरवरी, 2024 को मध्यप्रदेश से निर्विरोध राज्य सभा सदस्य चुने गए थे। उनका कार्यकाल 03 अप्रैल 2030 तक है।

संवैधानिक नियमों के अनुसार: एक व्यक्ति, दो सदन: क्या कहता है कानून? डॉ. मुरुगन की जीत की स्थिति में क्यों अनिवार्य होगा।

भारत के निर्वाचन नियमों और संवैधानिक प्रावधानों के तहत कोई भी व्यक्ति एक ही समय में संसद (लोक सभा,राज्य सभा) और राज्य विधानसभा का सदस्य नहीं रह सकता। यदि डॉ. एल. मुरुगन तमिलनाडु की अविनाशी सीट से विधानसभा चुनाव जीतते हैं, तो उनके सामने ‘दोहरी सदस्यता’ का कानूनी संकट खड़ा होगा।

14 दिनों का ‘अल्टीमेटम’: संवैधानिक अनिवार्यता:

भारतीय संविधान का अनुच्छेद 101(2) स्पष्ट रूप से कहता है कि कोई भी व्यक्ति एक ही समय में संसद और राज्य विधानमंडल के सदन का सदस्य नहीं होगा।

यदि कोई मौजूदा सांसद, विधानसभा का चुनाव जीतता है, तो उसे 14 दिनों के भीतर दोनों में से एक सदन की सदस्यता से इस्तीफा देना होता है।

चूंकि डॉ. मुरुगन केंद्र में मंत्री हैं और तमिलनाडु की राजनीति में सक्रिय भूमिका निभाने जा रहे हैं, विधानसभा जीतने की स्थिति में उनका राज्यसभा से इस्तीफा तय माना जा रहा है।

मध्य प्रदेश में क्यों बढ़ेगी हलचल?

जैसे ही डॉ. मुरुगन इस्तीफा देंगे, चुनाव आयोग को छह महीने के भीतर मध्यप्रदेश की रिक्त राज्य सभा सीट पर उप चुनाव (By-election) कराना होगा।

मध्यप्रदेश में संभावित राज्य सभा उप चुनाव को लेकर राजनीतिक हलकों में अभी से चर्चाएं तेज हो गई हैं। सत्तारूढ़ भाजपा के पास विधानसभा में बहुमत होने के कारण उप चुनाव में उसका पलड़ा भारी माना जा रहा है। ऐसे में यह देखना दिलचस्प होगा कि पार्टी इस संभावित सीट के लिए किस चेहरे पर दांव लगाती है।

तमिलनाडु में अविनाशी सीट पर डॉ. मुरुगन की उम्मीदवारी को भाजपा की रणनीतिक चाल के रूप में देखा जा रहा है, जहां पार्टी सामाजिक समीकरणों के साथ-साथ संगठनात्मक मजबूती के सहारे अपनी स्थिति सुदृढ़ करने का प्रयास कर रही है। चुनाव परिणाम न केवल राज्य की राजनीति, बल्कि मध्यप्रदेश के संसदीय समीकरणों पर भी असर डाल सकते हैं।

नए चेहरों की उम्मीद: इस संभावित उप चुनाव ने मध्यप्रदेश भाजपा के उन दिग्गज नेताओं की उम्मीदें जगा दी हैं जो पिछले समय में राज्य सभा की रेस से बाहर रह गए थे।

अब नजरें अविनाशी सीट के चुनाव परिणामों पर टिकी हैं, जो आगे की राजनीतिक दिशा तय करेंगे।

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