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मोहासा-बाबई प्रोजेक्ट आत्मनिर्भर और मेक इन इंडिया के विजन को करेगा साकार

भोपाल : रविवार, अक्टूबर 19, 2025
मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के संकल्प से मध्यप्रदेश की औद्योगिक नीति अब केवल कागजों तक सीमित नहीं रही है बल्कि प्रदेश की धरती पर औद्योगिक परिवर्तन की मजबूत नींव बन चुकी है। नर्मदापुरम जिले का मोहासा-बाबई इस दृष्टि का सशक्त उदाहरण बनकर उभरा है, जहां राज्य शासन ने विद्युत एवं नवीकरणीय ऊर्जा उपकरणों के विनिर्माण के लिए ऐसा औद्योगिक ढांचा विकसित किया है जो आने वाले वर्षों में भारत के ग्रीन इंडस्ट्रियल ट्रांजिशन की दिशा तय करेगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव का फोकस इस बात पर भी है कि प्रदेश में स्थापित हर औद्योगिक परियोजना केवल निवेश तक सीमित न रहे, बल्कि वह तकनीकी आत्मनिर्भरता, रोजगार सृजन और हरित विकास की भावना को आगे बढ़ाए। यही सोच मोहासा-बाबई प्रोजेक्ट को एक साधारण औद्योगिक विस्तार से आगे बढ़ाकर भविष्य की औद्योगिक क्रांति का आधार बना रही है।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में प्रदेश में औद्योगिक विकास केवल निवेश का प्रतीक नहीं, बल्कि एक व्यापक सामाजिक-आर्थिक परिवर्तन का माध्यम बन रहा है। उन्होंने यह सुनिश्चित किया है कि उद्योग केवल शहरों तक सीमित न रहें, बल्कि जिले और विकासखंड स्तर तक औद्योगिक ढांचे का विस्तार हो, जिससे प्रदेश के युवाओं को अपने ही क्षेत्र में रोजगार और उद्यम के अवसर मिल सकें। मुख्यमंत्री का यह विजन उद्योगों को स्थानीय संसाधनों, कौशल विकास और पर्यावरणीय संतुलन के साथ जोड़कर “विकास के विकेन्द्रीकरण” का नया मॉडल प्रस्तुत कर रहा है।

राज्य शासन द्वारा नर्मदापुरम जिले के मोहासा-बाबई औद्योगिक क्षेत्र को ग्रीन फील्ड मैन्युफैक्चरिंग जोन फॉर पॉवर एंड रिन्यूएबल एनर्जी इक्विपमेंट के रूप में विकसित किया गया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव के संकल्प और औद्योगिक नीति एवं निवेश प्रोत्साहन विभाग के सुविचारित कदमों ने इस परियोजना को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाई है। इस क्षेत्र में निवेश आकर्षित करने और इकाइयों को व्यवहारिक सुविधाएं देने के लिए ऐसी नीतियां लागू की गई हैं, जिनसे औद्योगिक माहौल निवेशकों के लिए और अधिक अनुकूल बना है।

फेज-1 में 884 एकड़ भूमि पर 22 इकाइयाँ
मोहासा-बाबई औद्योगिक क्षेत्र के फेज-1 में 884 एकड़ भूमि पर 22 इकाइयाँ को 514.50 एकड़ भूमि आवंटित की गई है। यहां 17,750 करोड़ रूपये के निवेश और 21,777 लोगों के लिए रोजगार के अवसर प्रस्तावित हुए हैं। यू एनर्जी, लेण्डसमिल ग्रीन एनर्जी, रेज ग्रीन एनर्जी मैन्युफैक्चरिंग जैसी प्रमुख कंपनियों ने अपने भूखण्डों पर निर्माण कार्य आरंभ कर दिया है। फेज-1 की सफलता ने राज्य शासन को अगले विस्तार के लिए मजबूत आधार दिया और इसी क्रम में फेज-2 का विकास प्रारंभ हुआ।

फेज-2 में 9 इकाइयों को 551 एकड़ भूमि आवंटित
फेज-2 में कुल 9 इकाइयों को 551 एकड़ भूमि आवंटित की गई है। इसमें 7 इकाइयाँ विद्युत एवं नवीकरणीय ऊर्जा उपकरण विनिर्माण क्षेत्र में और 2 इकाइयाँ औद्योगिक क्षेत्र मोहासा-बाबई के अंतर्गत स्थापित होंगी। इन इकाइयों में कुल 39,210.55 करोड़ रूपये का निवेश और 14,777 लोगों के लिए रोजगार है। इसमें सातविक सोलर इंडस्ट्रीज प्रा.लि. द्वारा 10,000 करोड़ रूपये के निवेश से 2,500 रोजगार और 185 एकड़ भूमि का उपयोग किया जा रहा है। ग्रेव पीवी प्रा.लि. द्वारा 5,533 करोड़ रूपये का निवेश, 1,320 रोजगार और 65 एकड़ भूमि, कॉस्मिक पीवी पावर लि. द्वारा 4,000 करोड़ रूपये का निवेश, 1,000 रोजगार और 60 एकड़ भूमि, गौतम सोलर पावर प्रा.लि. द्वारा 4,000 करोड़ रूपये का निवेश, 4,000 रोजगार और 40 एकड़ भूमि, ग्रेव एनर्जी प्रा.लि. द्वारा 3,997.85 करोड़ रूपये का निवेश, 1,657 रोजगार और 64 एकड़ भूमि, इंटीग्रेटेड बैटरिज इंडिया प्रा.लि. द्वारा 3,381 करोड़ रूपये का निवेश, 1,000 रोजगार और 40 एकड़ भूमि तथा एचईटीआईएच ग्रीन एनर्जी प्रा.लि. द्वारा 3,298.7 करोड़ रूपये का निवेश, 2,050 रोजगार और 52 एकड़ भूमि शामिल हैं। वहीं औद्योगिक क्षेत्र मोहासा-बाबई फेज-2 में ओरियाना पावर लि. द्वारा 4,500 करोड़ रूपये का निवेश, 1,000 रोजगार और 30 एकड़ भूमि, तथा एलेनबेरी इंडस्ट्रियल गैसेज लि. द्वारा 500 करोड़ रूपये का निवेश, 250 रोजगार और 15 एकड़ भूमि निर्धारित की गई है।

फेज-2 के निवेशकों को अत्यंत आकर्षक रियायतें प्रदान की जा रही हैं जिनमें प्रचलित भूमि मूल्य के केवल 25 प्रतिशत प्रीमियम पर भूखंड आवंटन, वास्तविक विकास शुल्क का भुगतान 20 वार्षिक किश्तों में करने की सुविधा, 100 प्रतिशत स्टाम्प ड्यूटी एवं पंजीयन शुल्क की प्रतिपूर्ति और जल आपूर्ति मात्र 25 रूपये प्रति किलोलीटर की दर पर उपलब्ध कराई जा रही है।

मोहासा-बाबई परियोजना हरित ऊर्जा उत्पादन को प्रोत्साहित करने के साथ-साथ स्वच्छ और सस्टेनेबल उद्योगों के लिए आदर्श मॉडल के रूप में विकसित हो रही है। यहां स्थापित इकाइयाँ सौर ऊर्जा, बैटरी निर्माण और ऊर्जा उपकरण उत्पादन के माध्यम से भारत की आयात निर्भरता को कम करेंगी और प्रदेश को ऊर्जा उपकरण निर्माण का केंद्र बनाएंगी। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का संकल्प है कि मध्यप्रदेश में हर औद्योगिक परियोजना विकास का नया मानक स्थापित करे और प्रदेश की औद्योगिक पहचान को राष्ट्रीय व वैश्विक स्तर पर नई ऊँचाई दे। मोहासा-बाबई प्रोजेक्ट इसी संकल्प का सशक्त उदाहरण बन चुका है।

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