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Jagdish Devda Deputy Chief Minister MP- मध्यप्रदेश के उपमुख्यमंत्री,वित्त श्री जगदीश देवड़ा ने राज्य का वर्ष 2026 और 2027 का विधानसभा में बजट पेश किया

Deputy Chief Minister MP Jagdish Devda- उपमुख्यमंत्री, वित्त विभाग, मध्यप्रदेश शासन श्री जगदीश देवड़ा द्वारा सदन में आज बुधबार,18 फरवरी, 2026 को प्रस्तुत किये गए बजट भाषण का मूलपाठ :-

 

 

एमपीपोस्ट, भोपाल : बुधवार, फरवरी 18, 2026। मध्यप्रदेश के उप मुख्यमंत्री, वित्त, श्री जगदीश देवड़ा ने वित्‍तीय वर्ष 2026 और 2027 के आय व्ययक का उपस्थापन किया तथा मध्यप्रदेश राजकोषीय उत्तरदायित्व एवं बजट प्रबंधन अधिनियम 2005 के अंतर्गत राजकोषीय नीति का विवरण मध्यप्रदेश विधानसभा में आज बुधवार दिनांक 18 फरवरी 2026 समय 11:03 बजे से अपराह्न 12.34 बजे तक बजट प्रस्तुत किया । मध्यप्रदेश विधानसभा 18 फरवरी 2026 को जैसे ही समवेत हुई मध्यप्रदेश विधान सभा के स्पीकर नरेंद्र सिंह तोमर ने विधानसभा की कार्यवाही को आगे बढ़ाते हुए मध्यप्रदेश के उप मुख्यमंत्री ,वित्त विभाग मध्यप्रदेश शासन, जगदीश देवड़ा से विधानसभा में मध्यप्रदेश सरकार का वर्ष 2026 और 2027 के बजट को प्रस्तुत करने को कहा। इसके बाद उप मुख्यमंत्री, वित्त विभाग श्री जगदीश देवड़ा ने अपना बजट सदन में पेश किया।

मध्यप्रदेश विधान सभा के अध्‍यक्ष की अनुमति से मध्यप्रदेश के उप मुख्यमंत्री, वित्त, श्री जगदीश देवड़ा ने सदन के समक्ष वित्‍त वर्ष 2026-27 का बजट अनुमान प्रस्‍तुत करते हुए कहा सर्वप्रथम मैं सदन को श्रद्धापूर्वक नमन करता हूँ। लोकतंत्र के पावन सभामंडप में विराजित माननीय सदस्यों एवं उनके माध्‍यम से समस्त प्रदेश वासियों को नमन करता हूँ।

वित्त, श्री जगदीश देवड़ा ने कुछ पंक्ति पढ़ते हुए बताया की ,

“प्रजासुखे सुखम् राज्ञ:, प्रजानाम् च हितम् हितम्”
अर्थात
“प्रजा के सुख में ही राजा का सुख है, प्रजा के हित में ही राजा का हित है।”

वित्‍तीय वर्ष 2025-26 की बजट यात्रा, ‘ज्ञान’ (GYAN) अर्थात गरीब, युवा, अन्नदाता तथा नारी को केन्‍द्र में रखकर प्रारंभ की गई थी। इस यात्रा को और अधिक सार्थक व परिणामजनक बनाने के लिए हमारी सरकार ने क्रमश: “आई” फॉर इंडस्ट्रियलाइजेशन एवं “आई” फॉर इंफ्रास्ट्रक्चर को भी शामिल किया है, जिससे ज्ञान (GYAN) से प्रारंभ यात्रा का अगला पड़ाव ‘ज्ञानी’ (GYANII) के स्वरूप में लक्षित है।

“हर हाथ को काम, हर उपज को दाम।
नारी को निर्णय का अधिकार, युवाओं के हौसलों का प्रसार।
अधोसंरचना का विस्तार, हर घर जल आपके द्वार।
स्‍वास्‍थ्‍य-सेवाओं में सुधार, जनकल्‍याण बेशुमार।”

हमारी सरकार ने औद्योगीकरण एवं अधोसंरचना में अभूतपूर्व कार्य किये हैं। मुझे सदन को अवगत कराते हुये प्रसन्‍नता है कि 2026 का वर्ष “किसान कल्‍याण वर्ष” के रूप में कृषि एवं किसानों के समग्र कल्‍याण के लिए समर्पित रहेगा।
हमें पूरा विश्‍वास है कि इस सदन के मार्गदर्शन व प्रदेश की जनता की भागीदारी से हमारा प्रदेश, अमृतकाल में माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी जी के सपनों का विकसित भारत बनाने में उल्‍लेखनीय योगदान के साथ अपना समृद्धतम स्‍वरूप भी प्राप्‍त करेगा।
महोदय, हमारा प्रदेश क्षेत्रफल के मान से भारत का दूसरा तथा जनसंख्‍या के मान से पाँचवाँ सबसे बड़ा राज्‍य है। प्रदेश का सौभाग्‍य है कि प्रदेश में 15 से 59 वर्ष आयु का कार्यशील वर्ग, कुल जनसंख्‍या का लगभग 62 प्रतिशत है। प्रदेश में 15 से 29 वर्ष के युवाओं की जनसंख्‍या लगभग 28 प्रतिशत होने से हम देश के तीसरे सबसे युवा प्रदेश हैं। हमारा यह दायित्‍व है कि युवा वर्ग के लिए गुणवत्‍तापूर्ण शिक्षा, कौशल विकास तथा रोज़गार के अवसर उपलब्‍ध हो सकें। आगामी वर्षों में जनसंख्या में वरिष्ठ नागरिकों के अनुपात में वृद्धि होगी, अतः न केवल आर्थिक अपितु प्रदेश के जनसांख्यिकीय, क्षेत्रीय संतुलन तथा सामाजिक कारकों को संज्ञान में रखकर, यह बजट तैयार किया गया है।
महोदय, भारत के यशस्‍वी प्रधानमंत्री आदरणीय श्री नरेन्‍द्र मोदी जी के मार्गदर्शन और प्रदेश के जनप्रिय एवं ऊर्जावान मुख्‍यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्‍व में हमारी सरकार सच्‍चे अर्थो में जनता की सरकार है। हमारी सरकार निर्धन एवं कमजोर वर्गों को अंतिम पंक्ति से प्रथम पंक्ति में लाने के लिए ज़मीन-आसमान एक करने वाली सरकार है।
हमारी सरकार, महिलाओं में आत्‍म–निर्भरता लाने वाली ”लाड़ली बहना योजना”, गरीब कल्‍याण की ”संबल योजना”, असहाय एवं निराश्रितों के जीवन को सुगम बनाने वाली सामाजिक पेंशन योजनाएँ और लाखों लोगों को स्‍वरोज़गार योजनाओं से जोड़कर एक नई आर्थिक क्रान्ति लाने वाली सरकार है। हमारी सरकार जनता के साथ मिलकर ”संकट को समाधान” में, ”मुश्किल को मुमकिन” में और ”असंभव को संभव” में बदलने वाली सरकार है।

बजट में नवाचार
मैं स्‍मरण कराना चाहूँगा कि हमारी सरकार द्वारा बजट प्रस्‍ताव तैयार करने की परम्‍परागत एवं यंत्रवत प्रक्रिया को वित्‍तीय वर्ष 2023-24 से, अधिक व्यावहारिक व सार्थक स्‍वरूप देने का नवाचार किया जा रहा है। इस नवाचार में आम जनता, प्रतिष्ठित अर्थशास्त्रियों तथा विषय विशेषज्ञों की वैचारिक भागीदारी सुनिश्चित की गई है। इसी क्रम को और आगे ले जाते हुए वित्‍तीय वर्ष 2025-26 में तैयार बजट, ”ज़ीरो बेस्‍ड बजट” था, जिसमें समस्त योजनाओं के प्रावधानों को नए सिरे से परीक्षित किया गया। इसके अतिरिक्त नवीन आवश्यकताओं के साथ-साथ लंबित दायित्वों को भी निराकृत करने का सफल प्रयास हुआ है। वित्‍तीय वर्ष 2025-26 के बजट में औद्योगिक निवेश, युवाओं के रोज़गार तथा श्रम कल्‍याण से संबंधित योजनाओं के विगत वर्षों के दायित्‍वों के लिए रुपये 3 हज़ार 500 करोड़ का व्यय सम्भावित है।
महोदय, मुझे यह अवगत कराते हुये गौरवानुभूति हो रही है कि हमारी सरकार ने नवाचारों की श्रृंखला में इस वर्ष एक और कड़ी “रोलिंग बजट” के रूप में जोड़ी है, जो एक गतिशील वित्‍तीय नियोजन की प्रक्रिया है। इसके आधार पर वित्‍तीय वर्ष 2026-27 के बजट प्रस्‍तावों के साथ वित्‍तीय वर्ष 2027-28 एवं 2028-29 के संभावित प्रस्तावों की एक झलक से सदन को अवगत कराने का नवाचार किया गया है। मेरी जानकारी में संभवत: हमारा प्रदेश, रोलिंग बजट प्रस्तुत करने वाला देश में प्रथम प्रदेश है। ”रोलिंग बजट” की जानकारी बजट साहित्‍य में पृथक से प्रकाशित है। इसके अतिरिक्त इस वर्ष एक नवीन संकलन ”बहुआयामी गरीबी सूचकांक” माननीय सदस्‍यों के लिए बजट साहित्‍य में उपलब्‍ध है। बहुआयामी गरीबी सूचकांक (एम पी आई) नीति आयोग द्वारा बनाया गया एक व्यापक सूचकांक है, जो गरीबी को केवल आय से नहीं, बल्कि स्वास्थ्य, शिक्षा और जीवन स्तर के 12 प्रमुख संकेतकों के आधार पर मापता है। हमारी सरकार ने पहली बार बहुआयामी गरीबी सूचकांक आधारित बजट प्रक्रिया को संस्थागत रूप दिया है।
वर्तमान जियो-पॉलिटिक्स एवं वैश्विक अस्थिरता के दृष्टिगत पूर्व वर्षों के मँहगे ब्याज दर एवं डॉलर मुद्रा आधारित ऋणों को कम ब्याज की दरों अथवा अन्य मुद्रा आधारित ऋणों से परिवर्तित करने का निर्णय लिया गया है। इसके तहत प्रस्ताव शीघ्र ही भारत सरकार को प्रेषित किया जायेगा। प्रदेश के ऋण प्रबंधन एवं राजकोषीय प्रबन्धन को और पारदर्शी तथा प्रभावी बनाने के उद्देश्य से “मध्यम अवधि ऋण प्रबंधन फ्रेमवर्क” को अधिक सुदृढ़ किया जा रहा है। इसके साथ ही बजट निर्माण की प्रक्रिया को अधिक वैज्ञानिक तथा सरलीकृत करने के उद्देश्य से नवीन बजट मैनुअल तैयार किया जा रहा है।

आर्थिक परिदृश्य
महोदय, हमारे देश का यह सौभाग्‍य है कि श्री नरेन्‍द्र मोदी जी का प्रभावकारी नेतृत्‍व देश को प्राप्‍त है। माननीय श्री मोदी जी की दूरदर्शिता एवं दृढ़प्रतिज्ञता के परिणामस्‍वरूप भारतीय अर्थव्‍यवस्‍था, विश्‍वसनीय अर्थव्‍यवस्‍था के रूप में उभरी है। वैश्विक अनिश्‍चितताओं के उपरांत भी अर्थव्‍यवस्‍था में निरन्‍तर गतिशीलता रहने के परिणामस्‍वरूप हमारा देश, विश्‍व की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्‍यवस्‍था बन गया है। मजबूत घरेलू माँग, डिजिटल एवं तकनीकी क्षमता, अधोसंरचना विस्‍तार एवं विनिर्माण जैसे कारकों से बने उत्‍साहजनक आर्थिक वातावरण से, प्रमुख देशों में हमारी अर्थव्यवस्था, वर्ष 2026 में विश्‍व की सर्वाधिक तेजी से बढ़ने वाली अर्थव्‍यवस्‍था होगी। वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए भारत सरकार के आर्थिक सर्वेक्षण के प्रथम अग्रिम अनुमान अनुसार भारत की सकल घरेलू उत्पाद की विकास दर 7.4 प्रतिशत है तथा आई.एम.एफ़. द्वारा भी यह दर 7.3 प्रतिशत अनुमानित की गई है जो वैश्विक औसत 3 प्रतिशत से अधिक है।
प्रदेश, विकसित भारत के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए अतुल्‍य कार्य कर रहा है अतएव प्रदेश के कर्मनिष्‍ठ व संकल्पित मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव जी के कुशल नेतृत्व में समृद्ध मध्‍यप्रदेश@2047 का दृष्टिपत्र तैयार किया गया है। वर्ष 2047 तक राज्‍य के सकल घरेलू उत्‍पाद को बढ़ाकर 2 ट्रिलियन डॉलर अर्थात रुपये 250 लाख करोड़ पहुँचाने एवं प्रति व्‍यक्ति वार्षिक आय रुपये 22 लाख 35 हज़ार के लक्ष्‍य को प्राप्‍त करने के लिए हर संभव प्रयास किये जा रहे हैं। मैं सदन को विश्‍वास दिलाता हूँ कि हम प्रदेश के दृष्टिपत्र के सभी लक्ष्‍यों को प्राप्‍त करना सुनिश्चित करेंगे।
प्रदेश की विकास यात्रा में क्षेत्रीय संतुलन को भी निरन्‍तर संज्ञान में रखा जा रहा है। मंत्रि-परिषद की बैठकें प्रदेश के विभिन्‍न अंचलों में किये जाने से अंचल की अपेक्षाओं के अनुसार योजना बनाने में मार्गदर्शन मिल रहा है।

जो कहा-सो किया
हमारी सरकार के लिए बजट, संवैधानिक दायित्‍वों के निर्वहन के साथ हमारी कथनी एवं करनी की समीक्षा का भी अवसर है। हम ”यथा वाचो तथा क्रिया” के नीतिवाक्‍य को आत्‍मसात कर आगे बढ़ रहे हैं।

“सच्चा वादा, पक्का काम
हमारी सरकार की है पहचान”

महोदय, मुझे यह अवगत कराते हुए प्रसन्नता, गर्व तथा संतोष है कि विगत बजट भाषण में घोषित प्रमुख नवीन कार्य प्रारंभ किए जा चुके हैं। ज़िला विकास सलाहकार समिति का गठन किया जा चुका है, इस समिति के माध्‍यम से ज़िले की प्राथमिकताओं के अनुसार विकास योजनाएं तैयार हो रही हैं। रुपये 21 हज़ार 630 करोड़ आकार की “मुख्यमंत्री मजरा-टोला सड़क योजना” की स्वीकृति दी जा चुकी है। मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा अंतर्गत शीघ्र ही बसें संचालित हो जाएंगी। निराश्रित गोवंश के संरक्षण के लिए गोशालाओं को देय अनुदान, प्रति गोवंश प्रति दिवस रुपये 20 से बढ़ाकर रुपये 40 किया गया है। ग्राम विकास पर केन्द्रित “मुख्यमंत्री वृन्दावन ग्राम योजना” स्वीकृत की जा चुकी है।
मुझे सदन को अवगत कराते हुए हर्ष है कि विगत बजट भाषण में कौशल विकास के उद्देश्य से घोषित “लोकमाता देवी अहिल्याबाई कौशल विकास कार्यक्रम” प्रारम्भ किया जा चुका है। गत बजट भाषण में निजी निवेश से संपत्ति निर्माण योजना की घोषणा की गई थी, मुझे प्रसन्नता है कि जन-निजी भागीदारी मॉडल पर हाल ही में धार एवं बैतूल में चिकित्सा महाविद्यालयों का शुभारंभ हुआ है।
मेट्रोपोलिटन रीजन डेवलपमेंट अथॉरिटी अन्‍तर्गत इंदौर एवं आस-पास के क्षेत्रों के समग्र विकास की रूप रेखा पर कार्य प्रारंभ हो चुका है। प्रदेश में नगरीय क्षेत्रों में गीता भवनों की स्‍थापना के कार्य प्रचलित हैं। इसी प्रकार अविरल निर्मल नर्मदा योजना आदि के भी कार्य प्रारंभ हो चुके हैं। राज्य स्तरीय बीमा समिति का गठन किया जा चुका है। विभिन्न विभागों में क्रमबद्ध रूप से शासकीय सेवकों की भर्तियाँ की जा रही हैं। शासकीय सेवकों से संबंधित घोषणाओं यथा- पेंशन निर्धारण की प्रक्रिया को फेसलेस किये जाने के लिए केन्‍द्रीकृत पेंशन प्रक्रिया प्रकोष्‍ठ का गठन तथा शासकीय सेवकों के भत्‍तों का पुनरीक्षण किया जा चुका है। अत: सदन आश्‍वस्‍त रहे कि इस बजट भाषण में सम्मिलित नवीन कार्यक्रमों पर भी समय-सीमा में सकारात्‍मक एवं परिणामजनक कार्य होंगे।

”मौजों के थपेड़े से डरकर, जो साहिल पर रुक जाते हैं,
वो लोग कहाँ कश्‍ती अपनी, तूफाँ में उतारा करते हैं।”

कृषक कल्‍याण
महोदय, हमारा प्रदेश कृषि उत्‍पादन तथा किसान कल्‍याण के स्‍वर्णिम युग की ओर अग्रसर है। हमारी सरकार ने किसानों की समृद्धि के लिए वर्ष 2026 को  “किसान कल्‍याण वर्ष” घोषित किया है। हमारी सरकार के लिए यह घोषणा सरकारी एजेण्‍डा नहीं बल्कि हकीकत में बदलने का संकल्प है।

“अन्नदाता के श्रम से खेतों में स्वर्ण निखरता है,
उन्नत बीज और तकनीक से, भाग्य नया अब सजता है।
समर्थ किसान और समृद्ध डगर की नई कहानी है,
धरती पुत्र के स्वाभिमान में, विकसित मध्‍यप्रदेश की निशानी है।

मुझे यह बताते हुये गर्व है कि हमारा प्रदेश दाल उत्‍पादन में प्रथम, गेहूं एवं तिलहन उत्‍पादन में द्वितीय स्‍थान रखता है। देश के कुल सोयाबीन उत्‍पादन का लगभग 35 प्रतिशत हमारे प्रदेश में उत्‍पादित होता है। हमारा प्रदेश, देश का तीसरा सबसे बड़ा दुग्‍ध उत्‍पादन वाला प्रदेश है। प्रदेश का, संतरा, टमाटर, धनिया एवं लहसुन उत्‍पादन में देश में प्रथम स्‍थान, सब्जियों एवं फूल उत्‍पादन में देश में दूसरा स्‍थान है। प्रदेश में 213 लाख हैक्‍टेयर क्षेत्र में 670 लाख मैट्रिक टन खाद्यान्न उत्‍पादन हो रहा है। प्रदेश में खाद्यान्‍न की कुल भण्‍डारण क्षमता 431 लाख 24 हज़ार मैट्रिक टन है, जो देश में सर्वाधिक है।
खेती के विभिन्न चरणों यथा- भूमि तैयार करने से शुरू करके उत्पाद की बिक्री तक की प्रक्रिया में किसानों को सहायता एवं मार्गदर्शन सुनिश्चित किया जा रहा है। कृषि भूमि तैयार करने के लिए कस्‍टम हायरिंग सेंटर्स के माध्‍यम से आधुनिक कृषि उपकरण, मिट्टी की गुणवत्‍तानुसार फसल के चयन के लिए सॉइल हेल्थ कार्ड, सहकारी समितियों के माध्‍यम से उन्‍नत बीज एवं उर्वरक, सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी तथा विश्वसनीय विद्युत आपूर्ति, फसल का भंडारण, उपज का मंडी तथा बाज़ार में विपणन, भावान्तर योजना, प्राकृतिक प्रकोप से क्षति की स्थिति में फसल बीमा, विभिन्न राहत योजनाओं के माध्यम से कृषकों को सहायता, जैविक एवं प्राकृतिक खेती को प्रोत्‍साहन तथा पोस्ट हार्वेस्ट नरवाई प्रबंधन जैसी गतिविधियों द्वारा कृषि कार्य के प्रत्येक चरण में किसानों के साथ हमारी सरकार खड़ी है। इसके साथ ही किसानों के लिए मुख्यमंत्री किसान सम्‍मान निधि तथा शून्य ब्याज पर कृषि ऋण जैसी आर्थिक समर्थन की योजनायें भी प्रचलित हैं।
कृषि उत्‍पादन में वृद्धि के लिए सिंचाई की आवश्‍यकता सर्वोपरि है। किसानों को स्थायी सिंचाई पम्‍प कनेक्‍शन की योजना अन्‍तर्गत 1 लाख 25 हज़ार ट्रांसफॉरमर्स स्थापित हैं। सिंचाई के लिए ऊर्जा की निर्बाध आपूर्ति और सुदृढ़ करने के लिए “प्रधानमंत्री कृषक सूर्य मित्र योजना” अंतर्गत वित्‍तीय वर्ष 2026-27 में रुपये 3 हज़ार करोड़ की लागत के 1 लाख सोलर सिंचाई पम्‍प, किसानों को उपलब्‍ध कराया जाना लक्षित है।
हमारी सरकार किसानों के लिए कृषि, उद्यानिकी, पशुपालन तथा मत्‍स्‍य पालन आदि को मूल्य संवर्द्धन से जोड़कर रोज़गार के व्‍यापक अवसर सृजित कर रही है। प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि अन्‍तर्गत किसान परिवारों को रुपये 6 हज़ार प्रतिवर्ष की आर्थिक सहायता प्राप्त हो रही है। हमारी सरकार द्वारा भी “मुख्यमंत्री किसान कल्याण योजना” अंतर्गत रुपये 6 हज़ार प्रतिवर्ष जोड़कर कुल रुपये 12 हज़ार प्रतिवर्ष का लाभ दिया जा रहा है।
भावान्‍तर योजना के अन्‍तर्गत सोयाबीन के लिए 6 लाख 44 हज़ार किसानों को रुपये 1 हज़ार 292 करोड़ का भुगतान किया गया है। भावान्‍तर योजना के सुपरिणामों से प्रभावित होकर अन्‍य प्रदेशों द्वारा भी योजना में रुचि दिखाई गई है।
महोदय, हमने विगत बजट भाषण में “मुख्यमंत्री कृषक उन्नति योजना” प्रारंभ करने की घोषणा की थी। इसके अंतर्गत किसानों को, पारिस्थितिकीय संतुलन हेतु सहायक फ़सलें लेने पर, राज्‍य सरकार द्वारा विशेष प्रोत्‍साहन राशि देने का प्रावधान है। मुझे अवगत कराते हुये प्रसन्‍नता है कि इस योजना अन्‍तर्गत 6 लाख 69 हज़ार किसानों को रुपये 337 करोड़ की प्रोत्‍साहन राशि दी गई है।
जैविक एवं प्राकृतिक खेती हमारी सरकार की उच्च प्राथमिकता है। हमारे प्रदेश में देश का सर्वाधिक प्रमाणित जैविक खेती क्षेत्र है। एपीडा संस्था द्वारा 10 लाख 13 हज़ार हैक्‍टेयर तथा वनोपज संग्रहण सहित कुल 21 लाख 42 हज़ार हैक्‍टेयर जैविक प्रमाणीकृत क्षेत्र पंजीकृत है। नेशनल मिशन फॉर नेचुरल फ़ार्मिंग अंतर्गत 1 लाख 89 हज़ार किसानों द्वारा 75 हज़ार 650 हैक्‍टेयर में प्राकृतिक खेती का लक्ष्‍य है। नरवाई जलाने की प्रथा को समाप्‍त करने के लिए फसल अवशेष प्रबंधन में उपयोगी कृषि उपकरण उपलब्‍ध कराये जाने के साथ सैटेलाईट के माध्‍यम से मॉनिटरिंग की जा रही है।
किसानों की सुविधा के लिए उन्‍नत सूचना प्रौद्योगिकी के उपयोग को बढ़ावा देने के उद्देश्य से एग्री-जी.आई.एस., एम.पी. किसान मोबाईल एप तथा एग्रीस्‍टेक का उपयोग किया जा रहा है। भारत सरकार के फसल बीमा पोर्टल का भू-अभिलेख पोर्टल से इंटीग्रेशन किया गया है। किसानों को उर्वरक की होम डिलीवरी का पायलट ई–विकास पोर्टल के माध्यम से सफलतापूर्वक तीन ज़िलों में सम्पन्न हो चुका है।
कृषि उपभोक्‍ताओं को विद्युत बिल में दी जा रही राहत के लिए रुपये 20 हज़ार 485 करोड़, प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के लिए रुपये 1 हज़ार 299 करोड़, मुख्‍यमंत्री किसान कल्याण योजना के लिए रुपये 5 हज़ार 500 करोड़ तथा ब्‍याज मुक्‍त अल्‍पकालीन कृषि ऋण के लिए रुपये 720 करोड़ के प्रावधान प्रस्तावित हैं।
वर्ष 2025-26 में समर्थन मूल्‍य पर 9 लाख 5 हज़ार किसानों से 77 लाख 74 हज़ार मैट्रिक टन गेहूं का उपार्जन कर, रुपये 20 हज़ार 213 करोड़ की राशि का भुगतान किया गया। इसके अतिरिक्त रुपये 1 हज़ार 360 करोड़ का बोनस भुगतान भी किया गया है। खरीफ विपणन वर्ष 2025-26 में 7 लाख 62 हज़ार किसानों से 51 लाख 74 हज़ार मैट्रिक टन धान का उपार्जन किया जाकर रुपये 11 हज़ार 744 करोड़ का भुगतान किया जा चुका है।
उद्यानिकी उत्‍पादों के बेहतर प्रसंस्‍करण एवं बाज़ार तक सुलभ पहुँच के माध्‍यम से उद्यानिकी गतिविधियों को प्रोत्‍साहित किया जा रहा है। प्रदेश में लगभग 28 लाख 42 हज़ार हैक्‍टेयर क्षेत्र में उद्यानिकी फसलों की पैदावार हो रही है। वर्तमान में फलों का उत्पादन 100 लाख मेट्रिक टन एवं सब्जियों का उत्पादन 259 लाख मेट्रिक टन से अधिक है। इसे वर्ष 2030 तक क्रमश: 136 लाख एवं 344 लाख मेट्रिक टन तक ले जाने का लक्ष्‍य है।
उद्यानिकी गतिविधियों के लिए इस वर्ष रुपये 772 करोड़ का प्रावधान प्रस्‍तावित है। इसमें प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्यम उन्नयन योजना के लिए रुपये 200 करोड़ एवं राष्ट्रीय उद्यानिकी मिशन के लिए रुपये 152 करोड़ के प्रावधान सम्मिलित हैं।
पशुपालन को व्यावसायिक गतिविधियों से जोड़कर प्रोत्‍साहित किया जा रहा है। प्रदेश के दुग्‍ध उत्‍पादकों के हित में “मुख्यमंत्री पशुपालन विकास योजना” अंतर्गत मध्यप्रदेश स्टेट को-ऑपरेटिव डेयरी फेडरेशन तथा संबद्ध दुग्ध संघों के संचालन एवं प्रबंधन के लिये राष्‍ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड के साथ अनुबंध किया जा चुका है। इस अनुबंध से दुग्ध सहकारी समितियों की संख्या तथा दुग्ध संकलन में वृद्धि हुई है। प्रदेश में वर्तमान में प्रति व्‍यक्ति प्रतिदिन दुग्‍ध उपलब्‍धता 707 ग्राम है, जो राष्‍ट्रीय औसत 485 ग्राम से लगभग 46 प्रतिशत अधिक है। हमारा लक्ष्य मध्यप्रदेश को देश की मिल्क कैपिटल बनाना है। इस उद्देश्य से “डॉ. भीमराव अम्बेडकर कामधेनु योजना” अंतर्गत डेयरी स्थापना के लिये हितग्राहियों को अनुदान दिया जा रहा है।
प्रदेश में संचालित लगभग 3 हज़ार गौशालाओं में 4 लाख 75 हज़ार गौवंश पालन हो रहा है। गौवंश की उपयुक्‍त एवं गरिमापूर्ण देख-भाल के लिए प्रदेश में स्वावलंबी गौशालाएँ स्थापित करने हेतु नीति तैयार की गई है। इस नीति के अन्‍तर्गत स्‍थापित होने वाली गौशालाएँ आधुनिक पद्धति से संचालित होंगी जिनमें जैविक खाद, पंचगव्य तथा बायोगैस का उत्‍पादन होगा।
पशुपालन गतिविधियों के लिए रुपये 2 हज़ार 364 करोड़ का प्रावधान प्रस्‍तावित है। इसमें “गौ-संवर्द्धन एवं पशुओं का संवर्द्धन योजना” के लिए रुपये 620 करोड़ 50 लाख एवं “मुख्‍यमंत्री पशुपालन विकास योजना” के लिए रुपये 250 करोड़ के प्रावधान सम्मिलित हैं।
मत्‍स्‍य उत्‍पादन में निजी भागीदारी को प्रोत्‍साहित किये जाने के साथ आधुनिक तकनीक के उपयोग को भी बढ़ाया गया है। वर्ष 2025-26 में दिसंबर, 2025 तक 3 लाख मैट्रिक टन से अधिक मत्‍स्‍य उत्‍पादन तथा 218 करोड़ स्‍टैण्‍डर्ड फ्राई मत्‍स्‍य बीज का उत्‍पादन किया गया है।
मत्‍स्‍य पालन गतिविधियों के लिए रुपये 412 करोड़ 89 लाख का प्रावधान प्रस्‍तावित है। इसमें प्रधानमंत्री मत्‍स्‍य संपदा योजना के लिए रुपये 181 करोड़ एवं मुख्‍यमंत्री मछुआ समृद्धि योजना के लिए रुपये 150 करोड़ के प्रावधान सम्मिलित हैं।
सहकारिता एक जन-आंदोलन है, जो मुख्यतः किसानों को कृषि ऋण, आवास, और उपभोक्ता वस्तुओं तक पहुँच प्रदान करता है। प्रदेश सरकार ‘सहकार से समृद्धि’ के विज़न के साथ  ई-सहकारिता पोर्टल के माध्यम से इस क्षेत्र में पारदर्शिता तथा आधुनिकीकरण की दिशा में कार्य कर रही है। प्रदेश में 4 हज़ार 536 प्राथमिक कृषि सहकारी समितियों के माध्‍यम से किसानों को शून्य ब्याज पर फसल ऋण उपलब्‍ध हो रहा है। वर्ष 2026-27 हेतु रुपये 25 हज़ार करोड़ का कृषि ऋण इन समितियों के माध्यम से वितरित किये जाने का लक्ष्य है। प्राथमिक कृषि सहकारी साख समितियों का कंप्यूटरीकरण किया जाकर किसानों को ई-सेवाएँ प्रदान करने के लिए 4 हज़ार से अधिक सामान्य सुविधा केंद्र शुरू किए जा चुके हैं।
प्रदेश में वर्तमान में लगभग 70 लाख किसान क्रेडिट कार्ड धारक हैं, जिनमें से लगभग 41 लाख किसानों को इन समितियों के माध्‍यम से रुपये 19 हज़ार 764 करोड़ का अल्‍पकालीन ऋण शून्य ब्याज दर पर उपलब्‍ध कराया गया है। “सहकारी बैंकों के माध्यम से कृषकों को अल्पकालीन ऋण पर ब्याज अनुदान” योजना हेतु रुपये 720 करोड़ का प्रावधान प्रस्तावित है।
ग्रामीणों को स्‍थानीय स्‍तर पर रेशम कीटपालन से स्‍वरोज़गार हेतु प्रारंभ की गई “रेशम समृद्धि योजना” के अन्‍तर्गत 1 हज़ार 600 ग्रामीणों को लाभान्वित किया गया है। प्रदेश में हाथकरघा एवं हस्तशिल्प क्षेत्र में रोज़गार के अवसरों की प्रचुर संभावनायें हैं। वर्तमान में 17 हज़ार 800 हथकरघों पर वस्त्र निर्माण किया जा रहा है, जिससे लगभग 34 हज़ार बुनकरों को रोज़गार प्राप्त हो रहा है। कुटीर एवं ग्रामोद्योग के लिए वर्ष 2026-27 में रुपये 145 करोड़ का प्रावधान प्रस्‍तावित है।
कृषि एवं संबद्ध क्षेत्रों के लिये रुपये 88 हज़ार 910 करोड़ का प्रावधान प्रस्तावित है। ग़ैर बजटीय स्रोतों को सम्मिलित करते हुए वर्ष 2026-27 में किसानों के लिए रुपये 1 लाख 15 हज़ार करोड़ के वित्तीय संसाधन उपलब्ध होंगे।

गरीब कल्‍याण
मुझे महाकवि ”रहीम” की पंक्तियाँ स्‍मरण में आ रही हैं:-

”दीन सबन को लखत है, दीनहि लखै न कोय,
जो रहीम दीनहि लखै, दीनबंधु सम होय”

हमारी सरकार अल्‍प आय तथा समाज की मुख्‍यधारा से पिछड़े हुए वर्ग के लिए बजट प्रावधान को एक शासकीय प्रक्रिया तक सीमित नहीं मानती। हमारी सरकार इस वर्ग के समग्र कल्‍याण, उत्‍थान व समाज की मुख्‍यधारा में लाने के लिए सम्‍पूर्ण संवेदनशीलता व सेवा भावना के साथ कार्य कर रही है।
प्रदेश की कुल जनसंख्‍या का लगभग 21 प्रतिशत अनुसूचित जनजाति तथा 16 प्रतिशत अनुसूचित जाति वर्ग है। प्रदेश में जनजातीय समूहों की संस्‍कृति, बोली, रहन-सहन, धार्मिक आस्‍थायें, सामाजिक संरचनायें आदि विविध और विशिष्ट हैं।
जनजाति बहुल क्षेत्र के समग्र विकास के लिए ”धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान” के तहत प्रदेश के 267 विकासखंडो के 11 हज़ार 377 गाँवों के कायाकल्‍प के कार्य किए जा रहे हैं, जिससे लगभग 94 लाख प्रदेशवासी लाभान्वित होंगे। इस हेतु वर्ष 2026-27 के लिए रुपये 793 करोड़ का प्रावधान प्रस्‍तावित है।
पिछड़ा वर्ग तथा अल्पसंख्यक वर्ग के विभिन्न परम्परागत व्यवसायों को प्रोत्‍साहित करने तथा वर्तमान बाज़ार की आवश्‍यकता अनुरूप बनाए जाने के लिए अपेक्षित प्रशिक्षण दिया जा रहा है। प्रदेश के पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक वर्ग के विद्यार्थियों के लिए छात्रावासों को आदर्श छात्रावास के रूप में विकसित किया जा रहा है। वर्ष 2025-26 में पिछड़ा वर्ग पोस्‍ट मैट्रिक छात्रवृत्ति के अन्‍तर्गत 7 लाख 50 हज़ार विद्यार्थियों को लाभान्वित किया गया है। “सरदार पटेल कोचिंग योजना” अंतर्गत 4 हज़ार विद्यार्थियों को लाभान्वित करने का लक्ष्य है।
विमुक्‍त, घुमक्‍कड़ एवं अर्द्ध घुमक्‍कड़ समुदाय को समाज की मुख्‍यधारा में लाये जाने के लिए प्रचलित योजनाओं यथा- छात्रवृत्ति, कन्‍याओं के शिक्षण हेतु प्रोत्‍साहन, बस्‍ती विकास, स्‍व-रोज़गार आदि को निरन्‍तर रखा गया है। पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक कल्याण, विमुक्‍त, घुमक्‍कड़ एवं अर्द्ध घुमक्‍कड़ वर्ग के लिये रुपये 1 हज़ार 691 करोड़ का प्रावधान प्रस्तावित है।
महोदय, यह खुशी की बात है कि प्रदेश में जीवन प्रत्‍याशा बेहतर हुई है परन्‍तु इसका दूसरा पहलू है कि कार्यशील जनसंख्‍या की तुलना में वरिष्ठ जनों की संख्‍या का अनुपात बढ़ रहा है। इस तथ्‍य के परिप्रेक्ष्‍य में अधिक आयु के व्‍यक्तियों के सुगम, स्वस्थ एवं सुरक्षित जीवन-यापन के लिए हमारी सरकार पूरी सेवा भावना के साथ कार्य कर रही है। रोज़गार के अधिक आकर्षक अवसरों के चलते परिवार के युवाओं का प्रव्रजन महानगरों की ओर हो रहा है। इससे प्रभावित वृद्धजनों को आवास, पौष्टिक भोजन, स्‍वास्‍थ्‍य सुविधायें आदि हेतु भोपाल में सर्वसुविधायुक्त वृद्धाश्रम ”संध्‍या छाया” प्रारंभ किया गया है। समाज के कमजोर वर्गों के लिए संचालित विभिन्‍न पेंशन योजनाओं के अंतर्गत वर्तमान में 54 लाख से अधिक नागरिकों को लाभान्वित किया जा रहा है।
इसके अतिरिक्‍त, राष्‍ट्रीय परिवार सहायता योजना, दिव्‍यांगों को आर्थिक सहायता, मुख्‍यमंत्री कन्‍या विवाह एवं निकाह योजना, माता-पिता भरण पोषण योजना, अटल वयो-अभ्‍युदय योजना आदि में आवश्‍यक धनराशि की व्‍यवस्‍था भी सुनिश्चित की गई है। इन सामाजिक सुरक्षा योजनाओं के लिए रुपये 2 हज़ार 857 करोड़ का प्रावधान प्रस्‍तावित है।
प्रधानमंत्री गरीब कल्‍याण अन्न योजना अन्‍तर्गत विगत 2 वर्षों में 5 करोड़ 25 लाख हितग्राहियों को रुपये 22 हज़ार 800 करोड़ का 66 लाख 25 हज़ार मैट्रिक टन नि:शुल्‍क खाद्यान्‍न वितरण किया गया है। पोषण स्तर को बढ़ाने के‍ लिए उचित मूल्‍य की दुकानों को “जन पोषण केन्‍द्रों” के रूप में उन्‍नयित किया जा रहा है। सार्वजनिक वितरण प्रणाली अंतर्गत खाद्यान्‍न वितरण की पारदर्शी व्‍यवस्‍था सुनिश्चित करने के लिए लगभग 93 प्रतिशत हितग्राहियों का ई-के.वाय.सी. किया जा चुका है।
प्रदेश को अपनी श्रम शक्ति पर गर्व है। माननीय प्रधानमंत्रीजी के नेतृत्‍व में केन्‍द्र सरकार द्वारा श्रम क्षेत्रों की सेवाओं में बेहतरी लाने के लिए पुराने एवं अप्रासंगिक हो चुके 29 श्रम कानूनों के स्‍थान पर 4 नवीन श्रम संहितायें अधिसूचित की गई हैं। हमारी सरकार ने कारखाना अधिनियम, ठेका श्रम अधिनियम तथा औद्योगिक विवाद अधिनियम में संशोधन किए हैं। श्रमिक व श्रमिक परिवारों के कल्‍याण के लिए प्रदेश में संचालित “मुख्‍यमंत्री जन-कल्‍याण संबल योजना” को निरन्‍तर रखा गया है।
प्रदेश में कामकाजी महिलाओं को बेहतर व सुरक्षित वातावरण प्रदान करने के लिए “कामकाजी महिलाओं के लिए छात्रावास का निर्माण” योजना के अंतर्गत प्रदेश के 4 औद्योगिक क्षेत्रों के निकट, 5 हज़ार 772 बेड्स क्षमता के हॉस्‍टल निर्माणाधीन हैं। इस क्षेत्र में जन-निजी भागीदारी को भी प्रोत्‍साहित किया जा रहा है। श्रम विभाग के लिए रुपये 1 हज़ार 335 करोड़ का प्रावधान प्रस्‍तावित है।
गरीब वर्ग के आर्थिक सशक्तीकरण व सुरक्षा में सहायक, प्रधानमंत्री जन-धन योजना के अन्‍तर्गत अब तक 4 करोड़ 61 लाख खाते खोले जा चुके हैं। प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना में 3 करोड़ 64 लाख, प्रधानमंत्री जीवन ज्‍योति बीमा योजना में 1 करोड 54 लाख तथा अटल पेंशन योजना में 46 लाख पंजीयन हैं।
शासन द्वारा आबादी भूमि पर ग्रामीण क्षेत्र में निवासरत 46 लाख 63 हज़ार परिवारों को रुपये 50 हज़ार करोड़ मूल्य की आबादी भूमि पर मालिकाना हक़ दिया जा चुका है। हमारी सरकार द्वारा निर्णय लिया गया है कि इस भूमि की रजिस्ट्री संबंधित परिवार के पक्ष में कराई जावेगी। इस हेतु स्टाम्प ड्यूटी एवं रजिस्ट्रेशन शुल्क का संपूर्ण व्यय राज्य शासन द्वारा वहन किया जायेगा। इस योजना अंतर्गत रुपये 3 हज़ार 800 करोड़ का प्रावधान प्रस्तावित है।

युवा कल्‍याण
माननीय अध्यक्ष जी, हमारी सरकार का युवाओं से आह्वान है:-
“दृढ़ निश्‍चय के पवित्र भावों से,
स्‍व-नयनों में विश्‍वास जगा,
लक्ष्‍य भेदकर आना होगा,
अंतस को उकसाना होगा”
कार्यशील जनसंख्‍या का बढ़ता अनुपात प्रदेश के आर्थिक विकास को गति देने के अवसर प्रदान करता है। हमारी सरकार युवा वर्ग के लिए गुणवत्‍तापूर्ण शिक्षा, कौशल विकास, रोज़गार के अवसर एवं उनकी आवश्‍यकताओं तथा आकांक्षाओं की पूर्ति की दिशा में प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है।
शिक्षा नई पीढ़ी के सृजनात्‍मक विकास का महत्‍वपूर्ण माध्‍यम है। हमारी सरकार नवीन शैक्षणिक संस्‍थाओं को प्रारंभ करने के साथ पूर्व से संचालित संस्‍थाओं में उत्‍कृष्‍ट शैक्षणिक व्‍यवस्‍था एवं अधोसंरचना सुनिश्चित कर रही है। विद्यालयों को बिजली आपूर्ति, इंटरनेट सुविधा एवं स्‍मार्ट कक्षाओं से सुसज्जित किया जा रहा है।
प्रदेश में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिए ”पी.एम.श्री योजना” अन्‍तर्गत 799 विद्यालय एवं 274 ”सांदीपनि विद्यालय” संचालित किए जा रहे हैं। प्रदेश ने प्रारंभिक बाल्‍यावस्‍था शिक्षा में उल्‍लेखनीय प्रगति की है। विद्यालयों तक पहुँच आसान बनाने के उद्देश्य से विद्यार्थियों को 4 लाख 85 हज़ार सायकिलें प्रदान की गई हैं। इसके अतिरिक्‍त 94 हज़ार 300 मेधावी विद्यार्थियों को लैपटॉप प्रदान किए गए हैं।
प्राथमिक, माध्‍यमिक तथा उच्‍चतर माध्‍यमिक स्‍तर की कक्षाओं के लिए 15 हज़ार शिक्षकों की नियुक्तियाँ प्रक्रियाधीन हैं। विद्यालय भवनों के संधारण एवं रख-रखाव के कार्य भी योजनाबद्ध रीति से किये जा रहे हैं। शिक्षा संबंधी प्रमुख योजनाओं जैसे सांदीपनि विद्यालय में रुपये 3 हज़ार 892 करोड़, साइकिलों का प्रदाय योजना में रुपये 210 करोड़, पी.एम.श्री योजना में रुपये 530 करोड़ तथा नि:शुल्‍क पाठ्य-पुस्‍तकों का प्रदाय योजना में रुपये 100 करोड़ के प्रावधान प्रस्‍तावित हैं।
जनजातीय कार्य विभाग द्वारा संचालित कुल 25 हज़ार 439 विद्यालयों में 20 लाख विद्यार्थी अध्‍ययनरत हैं। 94 सांदीपनि विद्यालयों को उत्‍कृष्‍ट अधोसंरचना एवं शैक्षणिक सुविधाओं से सुसज्जित किया जा रहा है। वर्ष 2025-26 में लगभग 3 लाख 40 हज़ार विद्यार्थियों को रुपये 458 करोड़ से अधिक की पोस्‍ट मैट्रिक छात्रवृत्ति का भुगतान किया गया। अनुसूचित जनजाति की शैक्षणिक संस्‍थाओं हेतु 4 हज़ार 485 शिक्षकों की भर्ती प्रक्रियाधीन है। छात्रवृत्ति की विभिन्‍न योजनाओं के लिए वित्‍तीय वर्ष 2026-27 के बजट में रुपये 986 करोड़ का प्रावधान प्रस्‍तावित है।
अनुसूचित जाति वर्ग के विद्यार्थियों हेतु प्रदेश में 10 ज्ञानोदय विद्यालयों को सी.बी.एस.ई. मापदण्‍डों के अनुसार अपग्रेड किया जा रहा है। इस वर्ग के विद्यार्थियों हेतु 1 हज़ार 913 छात्रावास संचालित हैं जिनकी कुल क्षमता 95 हज़ार है। युवाओं के स्वरोज़गार हेतु संत रविदास स्‍वरोज़गार योजना के अन्‍तर्गत 1 हज़ार 927 तथा डॉ. भीमराव अम्‍बेडकर आर्थिक कल्‍याण योजना के अन्‍तर्गत 2 हज़ार 316 प्रकरणों में ऋण वितरण किया गया है।
प्रदेश में उच्‍च शिक्षा के क्षेत्र में भी व्‍यापक विस्‍तार हुआ है। प्रदेश में 56 विश्वविद्यालय एवं 1 हज़ार 360 शासकीय उच्‍च शिक्षण संस्थानों में लगभग 16 लाख विद्यार्थी अध्‍ययनरत हैं। उच्‍च शिक्षा प्रणाली को और सुदृढ़ करने के लिए प्रदेश के प्रत्‍येक ज़िले में ”प्रधानमंत्री कॉलेज ऑफ एक्‍सीलेंस” संचालित हैं। इसके साथ ही नैक मूल्‍यांकन अंतर्गत 205 महाविद्यालय नैक एक्रिडेटेड हो चुके हैं। भवन विहीन महाविद्यालयों के लिए 31 नए भवनों के निर्माण तथा 96 महाविद्यालय भवनों के सुदृढ़ीकरण के कार्य भी प्रचलित हैं।
हमारी सरकार का यह प्रयास है कि हमारे प्रदेश के युवाओं के लिये उच्‍च शिक्षा सुलभ एवं रोजगारोन्‍मुखी हो। विश्‍वविद्यालयों में संचालित इन्‍क्‍यूबेशन केन्‍द्रों में एक वर्ष में 174 स्‍टार्टअप आरंभ किए गए हैं तथा एक वर्ष में 22 पेटेंट कराए गए हैं। विदेशों में उच्‍च शिक्षा अध्‍ययन हेतु विदेश अध्‍ययन छात्रवृत्ति प्रदान की जा रही है।
रोज़गार एवं स्‍वरोज़गार के क्षेत्र में तकनीकी शिक्षा एवं कौशल विकास की महत्‍ता एवं उपयोगिता में निरन्‍तर वृद्धि हो रही है। तकनीकी क्षेत्र के विभिन्‍न पाठ्यक्रमों में वर्ष 2024-25 की तुलना में वर्ष 2025-26 में विद्यार्थियों की संख्‍या में लगभग 26 प्रतिशत की उत्‍साहजनक वृद्धि हुई है। प्रदेश के समस्‍त शासकीय इंजीनियरिंग महाविद्यालयों में वाई-फाई कैंपस एवं स्‍मार्ट क्‍लास रूम स्‍थापित किए गये हैं। राष्‍ट्रीय रक्षा विश्‍वविद्यालय का परिसर राजीव गांधी प्रौद्योगिकी विश्‍वविद्यालय, भोपाल में प्रारंभ किया जा चुका है। वर्ष 2025 में अब तक आयोजित 608 रोज़गार मेलों तथा युवा संगम कार्यक्रम के माध्‍यम से 85 हज़ार युवाओं को ऑफर लेटर प्रदान किये गये हैं।
महोदय, खेल गतिविधियाँ, स्‍वस्‍थ मनोरंजन के साथ शारीरिक और मानसिक विकास के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। हमारी सरकार प्रदेश के युवाओं की खेल प्रतिभा को राष्‍ट्रीय एवं अन्‍तरराष्‍ट्रीय स्‍तर पर पहचान दिलाने के लिए प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है। विगत 2 वर्षों में प्रदेश के खिलाडियों ने अन्‍तरराष्‍ट्रीय स्‍तर पर 19 स्‍वर्ण, 29 रजत एवं 26 कांस्‍य पदक एवं राष्‍ट्रीय स्‍तर पर 189 स्‍वर्ण, 131 रजत तथा 118 कांस्‍य पदक प्राप्‍त कर, देश एवं प्रदेश का नाम गौरवान्वित किया है।
युवाओं की खेल अभिरुचियों के प्रोत्साहन हेतु विभिन्न योजनाओं को हमारी सरकार ने विगत 02 वर्षों में और विस्‍तारित किया है। हमारी सरकार ने “सी.एम. युवा-शक्ति” योजना के अंतर्गत सभी विधानसभा क्षेत्रों में सर्वसुलभ एवं सर्वसुविधा संपन्‍न स्‍टेडियम उपलब्‍ध कराये जाने की दिशा में कार्य प्रारंभ कर दिया है। वर्तमान में प्रदेश में 11 खेल अकादमियों में 18 खेलों की अन्‍तरराष्‍ट्रीय स्‍तर की अधोसरंचना, उपकरण व प्रशिक्षण सुविधायें हैं। प्रदेश में 4 हॉकी टर्फ तथा 30 खेल स्‍टेडियम निर्माणाधीन हैं। खेल एवं युवा कल्याण के क्षेत्र के लिए रुपये 815 करोड़ का बजट प्रावधान प्रस्‍तावित है।

नारी कल्‍याण
हमारी सरकार ने महिला सशक्तीकरण के लिए अनेक प्रभावशाली नीतियाँ और योजनाएँ लागू की हैं। महिला स्‍व-सहायता समूह, शासकीय सेवा तथा जन-प्रतिनिधियों के रूप में भूमिका, टोल-नाके तथा पेट्रोल पम्‍प जैसे पुरुष प्रधान व्‍यवसायों में प्रतिनिधित्‍व, खेती-किसानी, पुलिस व अन्‍य अर्द्धसैनिक बलों में बढ़ती भागीदारी तथा साहसिक खेलों में प्रदर्शन इसके प्रमाण हैं।
बालिकाओं के जन्म से लेकर उनकी शिक्षा और विवाह तक के लिए प्रदेश में वर्ष 2007 से लागू लाड़ली लक्ष्‍मी योजना को और परिणाममूलक स्‍वरूप देकर वर्ष 2022-23 से “लाड़ली लक्ष्‍मी योजना 2.0” लागू की गई है। इस योजना के अन्‍तर्गत अब तक 52 लाख 29 हज़ार बालिकाओं को लाभान्वित किया गया है। इसके साथ ही योजना में 14 लाख 12 हज़ार बालिकाओं को छात्रवृत्ति भी प्रदान की गई है। इस योजना के लिये रुपये 1 हज़ार 801 करोड़ का प्रावधान प्रस्तावित है।
प्रदेश में 2 हज़ार 949 आंगनबाड़ी केन्‍द्रों में शौचालय निर्माण तथा 31 हज़ार 425 आंगनबाड़ी भवनों में विद्युत व्‍यवस्‍था कार्य की स्‍वीकृति प्रदान की गई है। भारत सरकार से 24 हज़ार 662 सक्षम आंगनबाड़ी केन्‍द्रों को विकसित किये जाने की स्‍वीकृति प्राप्‍त हुई है, जिसके अंतर्गत स्‍मार्ट एल.ई.डी. टीवी, वॉटर प्यूरीफायर एवं खिलौने प्रदान किए जाने के साथ पोषण वाटिका का निर्माण तथा रेन वॉटर हार्वेस्टिंग की भी स्‍थापना की जा रही है। ”पोषण 2.0” अन्‍तर्गत मातृ पोषण, नवजातों एवं शिशुओं का आहार एवं स्‍वास्‍थ्‍य, गंभीर एवं अति गंभीर कुपोषित शिशुओं की चिकित्‍सा एवं सम्‍पूर्ण स्‍वास्‍थ्‍य की व्‍यवस्‍था सुनिश्चित की जा रही है।
नवीन प्रस्‍तावित “यशोदा दुग्‍ध प्रदाय योजना” के अन्‍तर्गत कक्षा 8 तक के प्रत्‍येक विद्यार्थी को अतिरिक्त पोषण प्रदाय के उद्देश्य से टेट्रा पैक में दुग्‍ध प्रदान किया जाएगा। वर्ष 2026-27 में इस योजनान्‍तर्गत 80 लाख विद्यार्थियों को दुग्‍ध पैकेट वितरित किये जाने का लक्ष्य है। आगामी पाँच वर्षों हेतु इस योजना का आकार रुपये 6 हज़ार 600 करोड़ है जिसमें से इस बजट में रुपये 700 करोड़ का प्रावधान प्रस्तावित है।
नारी स्‍वाभिमान एवं स्‍व-निर्भरता की प्रतीक ”लाड़ली बहना योजना” में वर्तमान में पंजीकृत महिलाओं की संख्‍या लगभग 1 करोड़ 25 लाख है। मुझे यह अवगत कराते हुये प्रसन्‍नता है कि लाड़ली बहनों को प्रतिमाह देय राशि रुपये 1 हज़ार 250 को बढ़ाकर रुपये 1 हज़ार 500 किया जा चुका है। इस योजना के लिये रुपये 23 हज़ार 882 करोड़ का प्रावधान प्रस्तावित है।
प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजनान्‍तर्गत, प्रारंभ से अब तक कुल 51 लाख 76 हज़ार हितग्राहियों का पंजीयन किया गया है। वित्‍तीय वर्ष 2025-26 में रुपये 210 करोड़ का भुगतान किया जा चुका है। इस योजना के लिये रुपये 386 करोड़ का प्रावधान प्रस्तावित है।
कामकाजी महिलाओं के लिए आवासीय सुविधा हेतु ज़िला उज्‍जैन, धार, रायसेन, भिंड, सिंगरौली, देवास, नर्मदापुरम एवं झाबुआ में “सखी-निवास” निर्माणाधीन हैं। मुख्‍यमंत्री उद्यमशक्ति योजना में वर्तमान तक कुल 41 हज़ार 767 स्‍वसहायता समूहों एवं 4 हज़ार 165 महिला उद्यमियों को लाभान्वित किया गया है।
हमारी सरकार द्वारा श्रम शक्ति में नारी शक्ति की भागीदारी बढ़ाने और प्रदेश के नौनिहालों को पोषण सुनिश्चित करने के उद्देश्य से आंगनबाड़ियों मे 19 हज़ार से ज्यादा पदों पर भर्ती की कार्यवाही की जा रही है। उज्ज्वला योजना अंतर्गत विगत 2 वर्ष में 6 करोड़ 28 लाख 23 हज़ार गैस सिलिन्डर रिफिल कर सहायता दी गई है।
नारी कल्‍याण संबंधी विभिन्‍न योजनाओं के लिए वर्ष 2026-27 में रुपये 1 लाख 27 हज़ार 555 करोड़ के प्रावधान प्रस्‍तावित हैं।

अधोसंरचना विस्तार तथा संधारण
महोदय, उत्तम अधोसंरचना का प्रदेश के विकास में बहुआयामी योगदान है। इससे उद्योग बढ़ते हैं, रोज़गार के अवसर उपलब्‍ध होते हैं, व्‍यापार फलता-फूलता है, परिवहन सुविधायें सुगम होती हैं और नागरिकों को बेहतर जीवन स्तर मिलता है। हमारी सरकार प्रदेश में अधोसंरचना विस्‍तार की दिशा में निरन्‍तर सुनियोजित कार्य कर रही है। आज प्रदेश में लगभग 1 लाख 85 हज़ार किलोमीटर सड़कें हैं, 54 लाख हेक्‍टेयर में सिंचाई की उपलब्‍धता है, गाँव-गाँव में पेयजल पहुँचा है, 25 हज़ार 514 मेगावाट विद्युत उत्‍पादन है। महोदय, ये आँकड़े स्‍वयं यह स्‍थापित कर रहे है कि:-
”पंख ही काफी नहीं होते, आसमान तक पहुंचने के लिए,
जूनून, जज़्बा व हौसला भी चाहिए, ऊंची उड़ान के लिए।“
पूँजीगत व्‍यय के लिए केन्‍द्र सरकार की विशेष केन्‍द्रीय सहायता योजना में हमारे प्रदेश का श्रेष्‍ठ प्रदर्शन रहा है। इस योजना के अंतर्गत विभिन्न मापदंडों के अनुपालन, अपेक्षित सुधार करने एवं चिह्नित योजनाओं को एसएनए स्पर्श पर ऑनबोर्ड करने से प्रदेश को रुपये 13 हज़ार 500 करोड़ की राशि मिलना सम्भावित है।
“किसान कल्याण वर्ष” की सार्थकता के लिए सिंचाई सुविधा के विस्‍तार के वृहद कार्य किये जा रहे हैं। नई सिंचाई परियोजनाओं के निर्माण के साथ यह भी सुनिश्चित किया जा रहा है कि सिंचाई जल के वाष्‍पीकरण एवं अन्‍य मानवीय हस्‍तक्षेपों के कारण होने वाले जल अपव्यय को रोका जाए। इस हेतु सूक्ष्‍म सिंचाई पद्धति एवं दाबयुक्त पाइपों के माध्‍यम से सिंचाई जल के उपयोग को प्रोत्साहन दिया जा रहा है। प्रदेश में उपलब्ध सिंचाई सुविधा को वर्ष 2029 तक 100 लाख हेक्‍टेयर किया जाएगा।
प्रदेश में 40 वृहद, 60 मध्‍यम एवं 273 लघु सिंचाई परियोजनायें निर्माणाधीन हैं। इन परियोजनाओं के पूर्ण होने पर 27 लाख 17 हज़ार किसान लाभा‍न्वित होंगे। हमारा प्रदेश, देश का पहला राज्‍य है जिसने अंतरराज्यीय नदियों को जोड़ने के महा-अभियान का संकल्‍प लिया है। प्रदेश में 2 राष्‍ट्रीय परियोजनाओं के माध्‍यम से 5 बड़ी नदियों को जोड़ने का कार्य प्रगतिरत है। रुपये 44 हज़ार 605 करोड़ की केन-बेतवा लिंक अंतरराज्यीय परियोजना से प्रदेश में 8 लाख 51 हज़ार हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई के साथ 130 मेगावाट विद्युत उत्पादन तथा 44 लाख नागरिकों के लिये पेयजल उपलब्ध होगा। पतने-ब्यारमा सूक्ष्म दाब सिंचाई परियोजना अंतर्गत पतने परियोजना से 1 लाख 35 हज़ार हेक्टेयर तथा ब्यारमा परियोजना से 1 लाख 15 हज़ार हेक्टेयर भूमि सिंचित होगी। रुपये 35 हज़ार करोड़ की पार्वती-कालीसिंध परियोजना से 6 लाख 16 हज़ार हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई के साथ 43 लाख नागरिकों के लिये पेयजल उपलब्ध होगा।
सिंचाई परियोजनाओं के निर्माण व संधारण के लिये वर्ष 2026-27 में रुपये 14 हज़ार 742 करोड़ का प्रावधान प्रस्तावित है।
”लोक निर्माण से लोक कल्‍याण” की दिशा में प्रदेश निरन्‍तर आगे बढ़ रहा है। वित्त वर्ष 2025-26 में अब तक 2 हज़ार 190 किलोमीटर सड़क निर्माण तथा उन्‍नयन, 992 किलोमीटर सड़क नवीनीकरण एवं 30 पुलों तथा रेल्वे ओवर ब्रिज के निर्माण पूर्ण किये गये हैं। इनके अतिरिक्‍त लगभग 3 हज़ार करोड़ लागत के कार्य जिनमें प्रमुख रूप से सिक्स लेन कोलार रोड, भोपाल में गायत्री मंदिर से गणेश मंदिर तक फ्लाई ओवर तथा दमोह नाका एलिवेटेड कॉरिडोर पूर्ण किये गये हैं।
वर्तमान में प्रदेश में प्रमुख रूप से 111 रेल्‍वे ओवर ब्रिज, अटेर जैतपुर मार्ग के मध्‍य चम्‍बल नदी पर उच्‍च स्‍तरीय पुल, भोपाल के संत हिरदाराम नगर में एलिवेटेड कॉरिडोर, ग्‍वालियर में स्‍वर्ण रेखा नदी पर एलिवेटेड कॉरिडोर, इंदौर में एलिवेटेड कॉरिडोर, उज्‍जैन में फोर लेन एलिवेटेड कॉरिडोर तथा महाकाल रोप-वे के निर्माण सम्मिलित हैं।
प्रदेश में सड़क अधोसंरचना के शीघ्र तथा गुणवत्‍तापूर्ण विकास के लिए हाईब्रिड एन्‍युटी मॉडल को अपनाया गया है। विगत 2 वर्षों में इस मॉडल के अन्‍तर्गत रुपये 12 हज़ार 676 करोड़ अनुमानित लागत की सड़क परियोजनायें स्‍वीकृत की गई हैं। प्रदेश में सड़क नेटवर्क रोड नेटवर्क मास्‍टर प्‍लान तैयार किया जा रहा है।
”प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना” अंतर्गत वर्ष 2025-26 में लगभग 1 हज़ार 500 किलोमीटर सड़कों के निर्माण एवं लगभग 7 हज़ार किलोमीटर सड़कों के नवीनीकरण का लक्ष्य पूर्ण होगा। विगत बजट भाषण में घोषित “मुख्यमंत्री मजरा-टोला सड़क योजना” के अंतर्गत ऐसी बसाहटें जिनमें मुख्य सड़क मार्ग से पहुँचने हेतु सड़क उपलब्ध नहीं है, के लिए 30 हज़ार 900 किलोमीटर सड़क निर्माण हेतु स्वीकृति दी गई है।
“क्षतिग्रस्त पुलों का पुनर्निर्माण योजना” के अन्‍तर्गत 1 हज़ार 766 पुल तथा पुलियों के निर्माण की रुपये 4 हज़ार 572 करोड़ की योजना स्‍वीकृत की गई है। इस योजना के लिये वर्ष 2026-27 में रुपये 900 करोड़ का प्रावधान प्रस्तावित है।
सड़कों एवं पुलों के निर्माण एवं संधारण के लिये वर्ष 2026-27 में रुपये 12 हज़ार 690 करोड़ का प्रावधान प्रस्तावित है।
प्रदेश में जल जीवन मिशन ”हर घर जल” के संकल्प के साथ ग्रामीण परिवारों को स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराने के लिए क्रियान्वित किया जा रहा है। मुझे अवगत कराते हुए प्रसन्‍नता है कि अब तक 24 हज़ार 411 ग्राम ”हर घर जल” घोषित किये गये हैं। इसके अतिरिक्‍त लगभग 5 लाख 75 हज़ार हैण्‍डपंपों के माध्‍यम से ग्रामीण बसाहटों में पेयजल उपलब्‍ध कराया जा रहा है। वित्‍तीय वर्ष 2025-26 में 4 लाख 93 हज़ार से अधिक घरेलू नल कनेक्‍शन दिए गये हैं। समूह जल प्रदाय परियोजनाओं के संचालन के विद्युत व्‍यय को कम करने के उद्देश्‍य से जन-निजी भागीदारी मॉडल पर 100 मेगावाट की सौर ऊर्जा परियोजना प्रारंभ की गई है।
नल कूपों के अनुरक्षण के लिए रुपये 104 करोड़, ग्रामीण समूह जल प्रदाय योजना के लिए रुपये 165 करोड़, पेयजल योजनाओं का जल निगम द्वारा क्रियान्‍वयन योजना के लिए रुपये 53 करोड़, सिंचाई एवं पेयजल योजना के सौर ऊर्जीकरण के लिए रुपये 156 करोड़ तथा जल जीवन मिशन के लिए रुपये 4 हज़ार 454 करोड़ का प्रावधान प्रस्‍तावित है।
हमारे प्रयासों के परिणामस्वरूप प्रदेश गहन अंधकार से विपुल प्रकाश की स्थिति में आ चुका है। यह इसलिए संभव हुआ है क्‍योंकि ”सोचने वालों की दुनिया, दुनिया वालों की सोच से अलग होती है”। प्रदेश अब ऊर्जा उपलब्धता में आत्मनिर्भरता के साथ अन्य राज्यों को भी बिजली निर्यात करने की क्षमता रखता है।
प्रदेश में भविष्‍य में विद्युत की बढ़ती आवश्‍यकता के दृष्टिगत 660 मेगावाट क्षमता की एक-एक इकाई अमरकंटक एवं सतपुड़ा ताप विद्युत गृह में स्‍थापित की जा रही है। इन परियोजनाओं का वित्तीय आकार रुपये 23 हज़ार करोड़ है। इसके अतिरिक्‍त, पुराने हो चुके ताप एवं जल विद्युत गृहों की क्षमता एवं जीवनकाल में वृद्धि एवं आधुनिकीकरण के कार्य भी किये जा रहे हैं।
हमारी सरकार, वर्ष 2030 तक नवकरणीय ऊर्जा क्षमता को 500 गीगावाट तक ले जाने के राष्‍ट्रीय लक्ष्‍य में उल्‍लेखनीय योगदान के लिए योजनाबद्ध रीति से कार्य कर रही है।  प्रदेश के निवेश सुगम वातावरण के कारण 170 मेगावाट क्षमता की नीमच सोलर परियोजना हेतु मात्र 2 रुपये 15 पैसे प्रति यूनिट की प्रतिस्पर्द्धी दर प्राप्त हुई है।
“सूर्य मित्र कृषि फीडर” योजना के अन्‍तर्गत लगभग 4 हज़ार मेगावाट की सोलर परियोजनाएं चिह्नित की गई हैं जिनमें किसानों एवं स्‍थानीय उद्यमियों की व्‍यापक भागीदारी सुनिश्चित की गई है। समस्‍त शासकीय भवनों पर विकासक के माध्‍यम से रूफटॉप सौर परियोजना प्रचलित है। राज्‍य में निरंतर स्‍वच्‍छ ऊर्जा उपलब्‍ध कराने हेतु 24 घंटे फ्लैट-ब्‍लॉक नवकरणीय ऊर्जा आपूर्ति परियेाजना प्रस्‍तावित है जो विश्‍व की अपनी तरह की पहली परियोजना होगी।
ऊर्जा क्षेत्र के लिए वर्ष 2026-27 में रुपये 34 हज़ार 65 करोड़ का प्रावधान प्रस्तावित है।
कृषि, स्वास्थ्य, ऊर्जा, जल आपूर्ति तथा नगरीय एवं ग्रामीण क्षेत्रों में मूलभूत आवश्यकताओं के कार्यों की निरन्तरता, गति तथा समय-सीमा में पूर्ण किए जाने के लिए वैकल्पिक वित्तीय संसाधनों की महती भूमिका है। मुझे सदन को अवगत कराते हुए हर्ष है कि प्रदेश के अधोसंरचना विकास के लिए नवाचारी वित्तीय उपकरणों का उपयोग कर पूँजीगत निवेश किया जाएगा। केंद्र सरकार के बजट में म्यूनिसपल बॉन्ड जारी करने पर प्रोत्साहन का प्रावधान रखा गया है। प्रदेश के नगरीय निकायों को इसका लाभ लेने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा। पूंजीगत व्यय का एक भाग गैर बजटीय साधनों से जुटाये जाने की आवश्‍यकता के दृष्टिगत विभिन्न वित्तीय उपकरणों यथा-इनविट (InviTs), रीट (REITS) तथा वैल्यू कैप्चर फंड आदि का उपयोग परियोजनाओं के वित्त पोषण के लिए किया जाएगा। सामाजिक सेवा प्रदाताओं को सामाजिक क्षेत्र में निवेश के लिए प्रोत्‍साहित किया जा रहा है। इस हेतु प्रदेश का पहला “सोशल इम्‍पैक्‍ट बॉन्ड” शीघ्र ही नेशनल स्टॉक एक्सचेंज के सोशल स्टॉक एक्सचेंज पर लिस्ट होगा।
राज्य शासन के सार्वजनिक उपक्रमों की निर्भरता मुख्यत: राज्य शासन के वित्तीय संसाधनों पर है। प्रदेश के विकास तथा लोक कल्याणकारी कार्यक्रमों में इन संस्थाओं की भूमिका को और व्यापक तथा मजबूत किए जाने की आवश्यकता है। वित्तीय वर्ष 2026-27 में नर्मदा बेसिन प्रोजेक्ट कंपनी लिमिटेड, मध्यप्रदेश पावर जनरेशन कंपनी, सड़क विकास निगम, मेट्रो रेल आदि संस्थानों के माध्यम से रुपये 17 हज़ार 350 करोड़ का पूँजीगत व्यय संभावित है। इस प्रकार प्रदेश के इतिहास में पहली बार प्रभावी पूँजीगत व्यय रुपये 1 लाख करोड़ से अधिक होगा।

प्रदेश में निवेश तथा औद्योगीकरण
वर्ष 2025 “उद्योग और रोज़गार वर्ष” रहा है। माननीय मुख्‍यमंत्री जी के अहर्निश प्रयासों से यह साल उद्योगों के माध्‍यम से प्रदेश में व्‍यापक बदलाव का साक्षी बना है। प्रदेश में, देश एवं विदेश से निवेश आकर्षित करने के लिए इंडस्ट्रियल कॉन्‍क्‍लेव, इंटरैक्टिव सेशन आदि से, औद्योगिक विस्‍तार एवं निवेश का वातावरण निर्मित हुआ है। प्रदेश में गत दो वर्षों में विभिन्न क्षेत्रों में कुल रुपये 33 लाख करोड़ के निवेश प्रस्ताव प्राप्‍त हुये हैं, जिनमें से रुपये 8 लाख 63 हज़ार करोड़ के कार्य प्रारंभ हो चुके हैं।
औद्योगिक विकास एवं निवेश को आकर्षित किये जाने के लिए म.प्र. एम.एस.एम.ई. विकास नीति 2025, म.प्र. एम.एस.एम.ई. औद्योगिक भूमि एवं भवन आवंटन तथा प्रबंधन नियम 2025 तथा उद्योग संवर्धन नीति 2025 लागू की गई है। इसके साथ ही वृहद श्रेणी की औद्योगिक इकाइयों को आकर्षित करने तथा निवेशकों के लिए एक समग्र पारिस्थितिकीय तंत्र मुहैया कराने के उद्देश्‍य से ”मध्‍यप्रदेश लॉजिस्टिक नीति 2025” एवं ”मध्‍यप्रदेश एक्‍सपोर्ट संवर्द्धन नीति 2025” भी जारी की गई हैं। प्रदेश को अंतरिक्ष विज्ञान के नवीन क्षेत्र में ले जाने के लिए “मध्‍यप्रदेश स्‍पेसटेक नीति 2026” का प्रभावी क्रियान्‍वयन किया जाएगा।
प्रदेश के सर्वांगीण विकास हेतु प्रदेश के सभी क्षेत्रों में औद्योगीकरण को बढ़ावा देने के लिए औद्योगिक पार्कों का विकास किया जा रहा है। वर्तमान में 19 हज़ार 300 एकड़ भूमि पर 48 औद्योगिक पार्क विकसित करने की कार्यवाही की जा रही है जिसमें 05 आई.टी. पार्क, प्‍लग एंड प्‍ले पार्क इंदौर, फ्लैटेड इंडस्ट्रीज़ एवं कमर्शियल कॉम्प्लेक्स मंडीदीप विकासाधीन हैं। रुपये 2 हज़ार 360 करोड़ लागत की इंदौर-पीथमपुर इकॉनोमिक कॉरिडोर परियोजना का विकास, उद्योग और निवेश को गति देने के उद्देश्य से किया जा रहा है।
दिल्‍ली-नागपुर औद्योगिक कॉरिडोर अंतर्गत बुंदेलखंड क्षेत्र में औद्योगिक विकास को गति देने के उद्देश्‍य से 1 हज़ार 500 एकड़ से अधिक भूमि पर सागर के औद्योगिक क्षेत्र ”मसवासी ग्रंट” के लिए विशेष औद्योगिक प्रोत्‍साहन पैकेज को मंजूरी दी गई है। देश को टेलीकॉम क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने के लिए ग्वालियर में टेलीकॉम मैन्युफैक्चरिंग जोन (TMZ) की स्थापना की दिशा में कार्यवाही प्रचलित है।
प्रदेश में 23 लाख से अधिक सूक्ष्‍म एवं लघु उद्योग पंजीकृत हैं, जिनमें से 4 लाख 50 हज़ार विनिर्माण इकाईयाँ लगभग 36 लाख रोज़गार सृजित करती हैं। विगत 2 वर्षों में मुख्‍यमंत्री उद्यम क्रांति योजना में 16 हज़ार 491 युवाओं को रुपये 1 हज़ार 134 करोड़ की ऋण राशि वितरित की गई है। 6 हज़ार 670 स्‍टार्टअप में महिलाओं द्वारा संचालित 3 हज़ार से अधिक स्‍टार्टअप हैं। “एक ज़िला एक उत्‍पाद” के अन्‍तर्गत ग्‍वालियर के मिंट स्‍टोन एवं छतरपुर के लकड़ी के फर्नीचर को जी.आई. टैग प्राप्‍त हुआ है।
प्रदेश में निवेश और औद्योगीकरण क्षेत्र में रुपये 5 हज़ार 957 करोड़ का बजट प्रावधान प्रस्तावित है।

स्वास्थ्य सेवायें
”स्‍वास्‍थ्‍य मानव की पूँजी है।” हमारी सरकार स्‍वास्‍थ्‍य सेवाओं को और अधिक सुदृढ़ तथा प्रत्‍येक नागरिक तक गुणवत्तापूर्ण उपचार सुविधा की उपलब्‍धता के लिए प्रतिबद्ध है। मुझे यह अवगत कराते हुये खुशी है कि डिजिटल स्‍वास्‍थ्‍य पहल वाले अग्रणी प्रदेशों में हमारा प्रदेश है। प्रदेश के 55 ज़िला चिकित्सालय, 158 सिविल चिकित्‍सालय, 348 सामुदायिक स्‍वास्‍थ्‍य केन्‍द्र, 1 हज़ार 442 प्राथमिक स्‍वास्‍थ्‍य केन्‍द्र तथा 10 हज़ार 256 उप स्‍वास्‍थ्‍य केन्‍द्रों में कुल 48 हज़ार बिस्‍तर उपलब्‍ध हैं। मैहर, मऊगंज एवं पांढुर्णा में नये ज़िला चिकित्‍सालयों की स्‍थापना की कार्यवाही प्रचलन में है। प्रदेश में पहली बार उच्‍च जोखिम वाले दूरस्‍थ क्षेत्रों में निवासरत गर्भवती महिलाओं हेतु स्‍वास्‍थ्‍य संस्‍थाओं में 228 बर्थ वेटिंग रूम स्‍थापित किए गए हैं।
हमारी सरकार ने चिकित्‍सा शिक्षा के विस्‍तार में ऐतिहासिक कार्य किये हैं। विगत दो वर्ष में प्रदेश में 5 नये शासकीय चिकित्‍सा महाविद्यालय प्रारंभ किये गये हैं। शासकीय चिकित्‍सा महाविद्यालयों में एम.बी.बी.एस पाठ्यक्रम की 2 हज़ार 275 सीट्स से बढ़कर 2 हज़ार 850 एवं स्‍नातकोत्‍तर के लिए 1 हज़ार 262 सीट्स से बढ़कर 1 हज़ार 468 सीट्स हो गई हैं। इन्‍दौर, रीवा एवं सतना के चिकित्‍सा महाविद्यालयों के उन्‍नयन के साथ भोपाल, इन्‍दौर, रीवा, जबलपुर, सागर, ग्‍वालियर के शासकीय चिकित्‍सा महाविद्यालयों में उन्‍नत चिकित्‍सा सेवाओं की व्‍यवस्‍था की गई है।
महोदय, मुझे सदन को यह अवगत कराते हुये खुशी है कि हमारी सरकार निजी क्षेत्र की सहभागिता से चिकित्‍सा महाविद्यालयों की स्‍थापना का नवाचार कर रही है। प्रदेश में जन-निजी भागीदारी के आधार पर धार, बैतूल एवं पन्‍ना में नवीन चिकित्‍सा महाविद्यालयों के लिए अनुबंध निष्‍पादित हो चुका है तथा 9 चिकित्‍सा महाविद्यालय क्रमश: भिंड, मुरैना, खरगौन, अशोकनगर, गुना, बालाघाट, टीकमगढ़, सीधी एवं शाजापुर में प्रारंभ किया जाना प्रक्रियाधीन है। लोक स्वास्थ्य संवर्ग के चिकित्‍सकों के 3 हज़ार 850 पदों तथा नर्सिंग अधिकारियों के 1 हज़ार 256 पदों पर भर्ती की कार्यवाही प्रक्रियाधीन है।
बहुप्रशंसित “प्रधानमंत्री जन आरोग्‍य योजना(आयुष्मान)” में 4 करोड़ 46 लाख से अधिक कार्ड जारी किए गए हैं। इसी प्रकार 70 वर्ष से अधिक आयु के नागरिकों हेतु आयुष्‍मान वय वंदना योजना के तहत 15 लाख 48 हज़ार आयुष्‍मान कार्ड बनाकर हमारा प्रदेश, देश के अग्रणी राज्‍यों में शामिल है। इस योजनान्‍तर्गत 1 हज़ार 118 शासकीय चिकित्‍सालय एवं 720 निजी चिकित्‍सालय सम्‍बद्ध हैं। इस योजना के लिए वर्ष 2026-27 हेतु रुपये 2 हज़ार 139 करोड़ का प्रावधान प्रस्तावित है।
भारतीय चिकित्‍सा पद्धति के माध्‍यम से निदान एवं उपचार उपलब्‍ध कराने की दिशा में हमारी सरकार निरन्‍तर कार्य कर रही है। प्रदेश में 8 नवीन आयुर्वेद महाविद्यालय सह चिकित्सालयों की स्थापना प्रचलित है।
प्रदेश के स्वास्थ्य क्षेत्र में कुल बजट प्रावधान रुपये 23 हज़ार 747 करोड़ प्रस्तावित है।

नगरीय विकास
प्रदेश में अधोसंरचना के विस्‍तार, औद्योगिक निवेश, जलवायु संतुलन, सुरक्षा एवं ‘ईज़ ऑफ लिविंग’ के लिए अपेक्षित वातावरण होने से प्रदेश में नगरीकरण बढ़ रहा है। अत: हमारी सरकार नगरों के सुनियोजित विकास के लिए प्रतिबद्धता के साथ आगे बढ़ रही है। प्रदेश में नगरीय विकास एक महत्वपूर्ण चरण में है, जहाँ आधुनिक तकनीक, हरित ऊर्जा और सार्वजनिक परिवहन इस विकास के मुख्य घटक हैं।
भोपाल एवं इंदौर में बहुप्रतीक्षित मेट्रो रेल का संचालन प्रारंभ हो चुका है। प्रदूषण मुक्त यातायात के उद्देश्य से पी.एम. ई-बस सेवा अन्‍तर्गत कुल 972 इलेक्ट्रिक बसों के परिवहन की स्वीकृति दी गई है। भोपाल, इंदौर, ग्वालियर, जबलपुर, सागर और उज्जैन में 472 ई-बसों का संचालन हो रहा है। हरित विकास को प्रोत्‍साहित किये जाने हेतु मध्‍यप्रदेश ई-वाहन नीति-2025 प्रभावशील की गई है।
महोदय, मुझे यह अवगत कराते हुये प्रसन्‍नता है कि भोपाल तथा इंदौर मेट्रोपॉलिटन रीजन डेव्हलपमेंट अथॉरिटी के गठन की अधिसूचना जारी की जा चुकी है। मेट्रोपॉलिटन रीजन में सभी आवश्‍यक बुनियादी सुविधाओं के साथ निवेश और रोज़गार के अवसर भी उपलब्‍ध होंगे। सुव्‍यवस्थित नगरीय एवं हरित विकास की दृष्टि से इंटीग्रेटेड टाउनशिप नीति-2025 लागू की गई है।
प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) के क्रियान्‍वयन में प्रदेश का अग्रणी स्‍थान है। इस योजना अन्‍तर्गत अब तक 8 लाख 77 हज़ार आवास निर्मित हो चुके हैं। अगले 5 वर्षों में 10 लाख नए आवासों के निर्माण का लक्ष्य है। पी.एम. स्‍वनिधि योजनान्‍तर्गत 1 लाख 79 हज़ार शहरी पथ विक्रेताओं को रुपये 408 करोड़ का ब्‍याज मुक्‍त ऋण प्रदान किया गया है।
प्रदेश के नगरीय निकायों में वार्ड स्तर पर अधोसंरचना विकास को गति देने के लिए नवीन प्रस्तावित “द्वारकानगर योजना” अंतर्गत आगामी 3 वर्षों में रुपये 5 हज़ार करोड़ का निवेश लक्षित है। नगरीय क्षेत्रों में आवास हेतु रुपये 2 हज़ार 316 करोड़, नगरों की सड़क मरम्‍मत के लिए रुपये 349 करोड़, अमृत 2.0 में रुपये 3 हज़ार 467 करोड़ तथा “नगरीय निकायों को मूलभूत सेवाओं हेतु एकमुश्त अनुदान” अंतर्गत वर्ष 2026-27 में रुपये 1 हज़ार 57 करोड़ का प्रावधान प्रस्तावित है।

सिं‍हस्‍थ महापर्व
सिंहस्थ महापर्व भारतीय संस्कृति और हिंदू धर्म का एक अत्यंत पवित्र और विशाल आध्यात्मिक समागम है। वैश्विक स्‍तर के इस महान आयोजन की सुविधाजनक एवं गरिमापूर्ण व्‍यवस्‍था के लिए हमारी सरकार समयबद्ध रीति से आगे बढ़ रही है। कर्मनिष्‍ठ मुख्‍यमंत्री डॉ. मोहन यादव जी के सक्षम व कुशल नेतृत्‍व में, सिंहस्‍थ क्षेत्र को भव्‍य स्‍वरूप दिया जा रहा है। इस हेतु रुपये 13 हज़ार 851 करोड़ के कार्य स्‍वीकृत हैं, जिनमें रुपये 1 हज़ार 164 करोड़ अनुमानित लागत का इंदौर-उज्‍जैन मार्ग का सिक्स लेन चौड़ीकरण कार्य, रुपये 1 हज़ार 370 करोड़ अनुमानित लागत का इंदौर-उज्‍जैन ग्रीनफील्‍ड हाईवे तथा रुपये 701 करोड़ अनुमानित लागत का उज्‍जैन बायपास मार्ग सम्मिलित हैं। वित्‍तीय वर्ष 2026-27 में इस हेतु रुपये 3 हज़ार 60 करोड़ का प्रावधान प्रस्‍तावित है।
नगरीय विकास के लिये इस बजट में रुपये 21 हज़ार 561 करोड़ का प्रावधान प्रस्तावित है।

ग्रामीण विकास
मैं शहर में और गाँव मुझमें रहता है। इस भावनात्‍मक दूरी को पाटने के प्रयास में हमारी सरकार प्रतिबद्ध है। ग्रामीण विकास में आर्थिक सशक्तीकरण एवं रोज़गार की महती भूमिका है। “विकसित भारत जी राम जी कार्यक्रम” के तहत जल संरक्षण, ग्रामीण ढाँचागत सुविधायें, आजीविका तथा प्रतिकूल मौसमी घटनाओं के प्रभावों को कम करने के कार्यों को भी सम्मिलित किया गया है। योजना के अंतर्गत अब 100 दिन के स्थान पर 125 दिन का रोज़गार उपलब्ध होगा। आगामी वर्ष में प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना-चतुर्थ चरण में 1 हज़ार 845 किलोमीटर लम्‍बाई के 867 मार्गों का निर्माण, पी.एम. जनमन (सड़क) अन्‍तर्गत 879 किलोमीटर लम्‍बाई के मार्ग तथा 60 पुलों के निर्माण, मुख्‍यमंत्री मजरा-टोला सड़क योजना अन्‍तर्गत 2 हज़ार किलोमीटर लम्‍बाई की सड़कों का निर्माण तथा 180 क्षतिग्रस्‍त पुलों के पुनर्निर्माण का लक्ष्‍य है। वर्ष 2026-27 में 8 हज़ार किलोमीटर सड़कों का पुनःडामरीकरण, 600 किलोमीटर सड़कों का उन्‍नयनीकरण एवं 89 हज़ार किलोमीटर सड़कों के संधारण का लक्ष्‍य है।
प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के अन्‍तर्गत निर्माणाधीन 7 लाख 32 हज़ार आवासों में से 4 लाख आवासों का निर्माण मार्च, 2026 तक पूर्ण हो जायेगा। पी.एम.जन-मन आवास योजना के अन्‍तर्गत 50 हज़ार आवास निर्माणाधीन हैं। स्‍वच्‍छ भारत मिशन (ग्रामीण) के अन्‍तर्गत वर्ष 2026-27 में 2 लाख व्‍यक्तिगत पारिवारिक शौचालय निर्माण तथा 505 सामुदायिक स्‍वच्‍छता परिसर के निर्माण का लक्ष्‍य है।
पंचायतों को सर्वांगीण विकास में सहायता देने के उद्देश्य से मूलभूत सेवाओं हेतु अनुदान में इस वर्ष रुपये 3 हज़ार 736 करोड़ का प्रावधान प्रस्तावित है। ग्रामीण विकास से संबंधित महत्‍वपूर्ण योजनाओं यथा- प्रधानमंत्री आवास योजना के लिए रुपये 6 हज़ार 850 करोड़, “विकसित भारत जी राम जी” योजना के लिए रुपये 10 हज़ार 428 करोड़, प्रधानमंत्री जनमन योजना (आवास) के लिए रुपये 900 करोड़, प्रधानमंत्री जनमन योजना (सड़क) के लिए रुपये 603 करोड़, प्रधानमंत्री पोषण शक्ति निर्माण एवं सहायक योजनाओं के लिए रुपये 1 हज़ार 884 करोड़, राष्‍ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन एवं सहायक योजनाओं के लिए रुपये 807 करोड़, स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) के लिए रुपये 400 करोड़ तथा प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के लिए रुपये 300 करोड़ के प्रावधान प्रस्‍तावित हैं।
पंचायत एवं ग्रामीण विकास के लिये वर्ष 2026-27 में रुपये 40 हज़ार 62 करोड़ का प्रावधान प्रस्तावित है।

ग्रीन बजट
मध्‍यप्रदेश को देश का हरित प्रदेश कहा जाता है। प्रदेश में लगभग 77 हज़ार वर्ग किलोमीटर का वन आवरण है, जो कि देश में सर्वाधिक है। प्रदेश में वायु प्रदूषण को कम करने के लिए शहरी यातायात में इलेक्ट्रिक वाहनों के उपयोग को प्रोत्‍साहन दिया जा रहा है। राज्‍य शासन के विभागों में भी ई-वाहनों के उपयोग को प्राथमिकता दी जा रही है। इन्‍दौर एवं भोपाल में मेट्रो रेल के परिचालन के प्रारंभ होने के साथ मार्गों के विस्तार का कार्य निरंतर है।
पर्यावरण संरक्षण के प्रोत्‍साहन हेतु मध्‍यप्रदेश राज्‍य में पंजीकृत होने वाले समस्‍त श्रेणी के इलेक्ट्रिक वाहनों पर मोटरयान कर की पूर्णत: तथा सी.एन.जी वाहनों पर 1 प्रतिशत की छूट दी गई है। इसके अतिरिक्‍त उत्‍सर्जन मानक के पुराने वाहनों को रजिस्‍टर्ड वाहन स्‍क्रेपिंग सुविधा के माध्‍यम से स्‍क्रेप कराने एवं उसी श्रेणी का नवीन वाहन क्रय करने पर मोटरयान कर पर 50 प्रतिशत तथा अन्‍य मानकों के वाहनों के लिए 25 प्रतिशत की छूट दी जा रही है।
माननीय महोदय,
छायामन्‍यस्‍य कुर्वन्ति, तिष्‍ठन्ति स्वयमातपे।
फलान्‍यपि परार्थाय, वृक्षा: सत्‍पुरूषा: इव।।
अर्थात्
“वृक्ष दूसरों को छाया देते हैं, खुद धूप में खड़े रहते हैं, फल भी दूसरों के लिए होते हैं, सचमुच वृक्ष सत्पुरुष जैसे होते हैं।”
वनांचल में निवासरत नागरिकों की वन प्रबंधन में भागीदारी तथा वनों से जीविकोपार्जन का स्‍त्रोत निरन्‍तर बनाये रखने के लिए हमारी सरकार निरन्‍तर प्रयासरत है। उल्‍लेखनीय है कि वन विभाग की गतिविधियों के अन्‍तर्गत इस वर्ष 1 करोड़ 11 लाख रोज़गार दिवसों का सृजन हुआ है। वर्ष 2025-26 में लगभग 2 लाख हैक्‍टेयर वन क्षेत्र में वनों के पुनरुत्पादन एवं पुनर्स्थापना के कार्य प्रगतिरत हैं। वर्ष 2026-27 में लगभग 2 लाख हैक्‍टेयर वन क्षेत्र उपचारित किये जाने का लक्ष्‍य है। इस वर्ष 5 करोड़ 88 लाख पौधे रोपित किये जाने के साथ अविरल निर्मल नर्मदा योजना के तहत 5 हज़ार 223 हैक्‍टेयर क्षेत्र में रोपण तैयारी एवं भू-जल संबर्द्धन कार्य किये गये हैं। इस वर्ष 10 हैक्‍टेयर क्षेत्र में 5 हज़ार चंदन प्रजाति का वृक्षारोपण किया गया है।
प्रदेश में 9 टाईगर रिज़र्व के अतिरिक्‍त, सागर ज़िले में डॉ. भीमराव अम्‍बेडकर अभयारण्य तथा श्योपुर ज़िले में जहानगढ़ अभयारण्य स्थापित किए गए हैं। उज्‍जैन, सतना, छतरपुर एवं भोपाल के अतिरिक्‍त ओरछा, धर्मराजेश्‍वर (मंदसौर) एवं बुरहानपुर में सांस्कृतिक वनों की स्‍थापना की जायेगी।
वन भूमि से अतिक्रमण हटाकर पौधारोपण कार्य के लिए नवीन योजना “समृद्धिवन -वनवृद्धि से जन समृद्धि” तथा निजी भूमि पर पौधारोपण कर काष्‍ठ की आवश्‍यकता की पूर्ति के माध्‍यम से आय का साधन बढ़ाने के लिए ”कृषि वानिकी योजना” प्रस्‍तावित है। आध्‍यात्मिक महत्‍व एवं सांस्‍कृतिक विरासत के वन क्षेत्रों के संरक्षण की ”जनजातीय देवलोक वनों की संरक्षण योजना” नवीन योजना प्रस्‍तावित है।
वन क्षेत्र में कैम्पा निधि के माध्यम से रुपये 2 हज़ार 89 करोड़ राशि के कार्य कराए जाना प्रस्तावित हैं। वन एवं पर्यावरण क्षेत्र के लिए रुपए 6 हज़ार 151 करोड़ का प्रावधान प्रस्तावित है।

पर्यटन एवं संस्कृति
प्रदेश में पर्यटन आकर्षणों की विविधता व बहुलता है। प्रदेश में ऐतिहासिक, पुरातात्विक, प्राकृतिक सौन्‍दर्य, धार्मिक महत्‍व तथा राष्‍ट्रीय वनोद्यान एवं अभयारण्‍यों की उपस्थिति के परिणामस्‍वरूप साल दर साल पर्यटकों की संख्‍या में वृद्धि हो रही है। प्रदेश की समृद्ध संस्‍कृति एवं विरासत के अपार आकर्षण को पर्यटन में परिवर्तित किये जाने के प्रयासों के उद्देश्य से पर्यटन नीति-2025 एवं फिल्‍म पर्यटन नीति-2025 तैयार की गई है।
मध्‍यप्रदेश, देश का पहला प्रदेश है जिसने ईको सेंसिटिव ज़ोनल मास्‍टर प्‍लान बनाने का कार्य प्रारंभ किया है। ओंकारेश्‍वर, भोजपुर, सलकनपुर, रायसेन किला, जानापाव, भेड़ाघाट से चौंसठ योगिनी एवं नरवर किले में रोप-वे प्रस्‍तावित हैं।
धार्मिक एवं सांस्‍कृतिक पर्यटन को प्रोत्‍साहित करने के लिए प्रदेश में रुपये 900 करोड़ से अधिक लागत के 17 सांस्‍कृतिक एवं धार्मिक लोकों के निर्माण कार्य पूर्णता की ओर हैं। हमारी सरकार के विशेष प्रयासों से प्रदेश की संस्‍कृति एवं विरासत को वैश्विक मान्‍यता प्राप्‍त हुई है। इसके सुखद परिणामस्‍वरूप ग्‍वालियर किला, भोजपुर मंदिर सहित प्रदेश के 15 स्‍थल यूनेस्‍को विश्‍व विरासत की अनंतिम सूची में सम्मिलित हुए हैं।
बुन्देलखण्ड अंचल में पर्यटन की असीम सम्भावनाओं के दृष्टिगत पर्यटन स्थलों का वैश्विक स्तर पर विकास किया जा रहा है। खजुराहो को “50 वैश्विक प्रतिस्पर्द्धी पर्यटन गंतव्य योजना” के अंतर्गत वैश्विक पर्यटन स्थल के रूप में विकसित किया जा रहा है। धार्मिक आस्था और ऐतिहासिक धरोहर के संगम ओरछा का विकास “आइकॉनिक पर्यटन स्थलों का वैश्विक स्तर पर विकास” योजना के अंतर्गत किया जा रहा है। महेश्वर में देवी अहिल्या लोक को एक विशिष्ट सांस्कृतिक केंद्र के रूप में विकसित किया जा रहा है, जिसमें “संस्कृति कल्पवृक्ष यात्रा” के माध्यम से इतिहास को सजीव एवं प्रभावशाली रूप में प्रस्तुत किया जाएगा। इसी प्रकार ग्राम केरियाखेड़ी, महेश्वर को क्राफ्ट हैंडलूम विलेज तथा कुक्षी को क्राफ्ट टूरिज्म विलेज के रूप में विकसित किया जा रहा है।
अनुसूचित जनजाति की जीवन्तता को अभिव्यक्ति देते, आलंकारिक शिल्प सृजन के लिये “आदिवर्त जनजातीय एवं लोक कला राज्य संग्रहालय-खजुराहो” में देश की पारम्परिक कलाओं के प्रथम ‘गुरुकुल’ की स्थापना की गई है। मध्यप्रदेश की जनजातीय बोलियों के मौखिक साहित्य को पुस्तक के रूप में प्रकाशित कर, जनजातीय गीतों तथा गायन परम्परा को आधुनिक माध्यमों में संरक्षित किये जाने के कार्य किए जा रहे हैं। देश में पहली बार मध्यप्रदेश के पाँच घुमन्तू तथा विमुक्त समुदायों पारधी, कुचबंदिया, बंजारा, गाडुलिया लोहार और बेड़िया समुदायों की विलुप्त होती बोलियों के शब्द संचय की प्रविधि और टॉकिंग डिक्शनरी निर्माण का कार्य किया गया है।
हमारी सरकार वरिष्ठजनों को देश के प्रमुख तीर्थ स्‍थलों की यात्रा की सुविधा प्रदान कर वरिष्‍ठजनों के प्रति अपने कर्तव्‍यों का निर्वहन कर रही है। मुख्‍यमंत्री तीर्थ दर्शन योजना में वर्ष 2025-26 में 9 हज़ार 600 वरिष्ठ जनों को तीर्थयात्रा कराई गई है। इस योजना अंतर्गत बजट में रुपये 50 करोड़ का प्रावधान प्रस्‍तावित है।
प्रदेश में वायु मार्ग से यातायात की सुविधा के विस्‍तार के कार्य किये जा रहे हैं। रीवा से खजुराहो, इंदौर, चित्रकूट, भोपाल, नई दिल्ली तथा दतिया से भोपाल के मध्य उड़ानों का संचालन प्रारंभ हो चुका है।
पर्यटन, संस्कृति एवं धर्मस्व के क्षेत्र में रुपये 2 हज़ार 55 करोड़ का प्रावधान प्रस्तावित है।

कानून व्यवस्था एवं लोक शांति
प्रदेश में आंतरिक सुरक्षा, लोक शांति एवं कानून व्‍यवस्‍था की आर्थिक तथा सामाजिक विकास में महती भूमिका है। हमारी सरकार पुलिस विभाग की समस्‍त इकाइयों को सुदृढ़ एवं आधुनिक संसाधनों से सुसज्जित करने के साथ अंतर्राष्‍ट्रीय स्‍तर की प्रशिक्षण सुविधायें भी उपलब्‍ध करा रही है। इस हेतु इंटीग्रेटेड सिक्‍योरिटी कॉम्प्लेक्स निर्मित हो चुका है। नवीन भर्ती हेतु स्‍वीकृत 22 हज़ार 500 पदों पर चरणबद्ध रीति से भर्ती की कार्यवाही प्रक्रियाधीन है।
आपराधिक न्‍याय प्रणाली के विभिन्‍न घटकों यथा- पुलिस, न्‍यायपालिका, अभियोजन, जेल, स्‍वास्‍थ्‍य एवं फॉरेंसिक विभागों के मध्‍य निर्बाध डिजिटल डाटा साझा करने के दृष्टिगत एकीकृत डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म विकसित किया गया है। इस प्रणाली के अन्‍तर्गत 14 लाख से अधिक ई-समन एवं वारंट तामील किये गये हैं। नवीन कानून के अन्‍तर्गत ई-साक्ष्‍य एप पर 1 लाख 39 हज़ार से अधिक ई-साक्ष्‍य की कार्यवाही हुई है।
अपराध अनुसंधान को त्वरित एवं प्रभावी बनाने की दृष्टि से ई-विवेचना एप विकसित किया गया है। ई-विवेचना अंतर्गत 25 हज़ार टैबलेट प्रदान किए जा रहे हैं। आपातकालीन सेवा नंबर 112 से अन्‍य सेवायें यथा- एम्‍बुलेंस, अग्निशमन, महिला आपदा प्रबंधन, रेल मदद तथा एक्‍सीडेंट रिस्‍पॉन्‍स सर्विस आदि भी समेकित की गई हैं।
हमारी सरकार पुलिस कर्मियों के साथ उनके परिवार को बेहतर मूलभूत सुविधायें उपलब्‍ध करा रही है। पुलिस कर्मियों हेतु अब तक 11 हज़ार नवीन आवास निर्मित हो चुके हैं। प्रशासकीय भवनों के अन्‍तर्गत 254 थाने, 199 पुलिस चौकी तथा 24 प्रशासकीय भवन निर्मित किये जा रहे हैं।
प्रदेश की समस्‍त जेलों में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग की सुविधा उपलब्‍ध है। वर्ष 2025-26 में 1 हज़ार अतिरिक्‍त वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग कक्ष स्‍वीकृत किये गये हैं। गरीब बंदी सहायता योजना के क्रियान्‍वयन में प्रदेश का प्रथम स्‍थान रहा है।
मुझे यह घोषित करते हुये गर्व है कि हमारे प्रदेश के दृढ़प्रतिज्ञ मुख्‍यमंत्री जी के नेतृत्‍व में प्रदेश से नक्‍सल समस्‍या समाप्‍त किया गया है। इस हेतु नक्‍सल प्रभावित क्षेत्र की जनता, सेवारत शासकीय सेवकों एवं पुलिस बल की सराहना करता हूँ।
कानून व्यवस्था एवं लोक शांति के क्षेत्र हेतु वर्ष 2026-27 में रुपये 14 हज़ार 306 करोड़ का प्रावधान प्रस्तावित है।

खनिज साधन
महोदय, हमारा प्रदेश, देश का चौथा खनिज संपन्‍न प्रदेश है। हीरे की उपलब्‍धता में प्रदेश का देश में लगभग एकाधिकार है। हमारा प्रदेश, खनन सुधार, नीलामी, पारदर्शी खनन व्यवस्था के आधार पर भारत सरकार द्वारा जारी स्टेट माइनिंग रेडीनेस इंडेक्स में प्रथम स्थान पर है। पन्ना के हीरे को जी.आई.टैग प्राप्त हुआ है। खनिज आधारित उद्योगों के विस्तार तथा निवेश आकर्षित करने हेतु अगस्त, 2025 में संपन्न स्टेट माइनिंग कॉनक्लेव में रुपये 56 हज़ार 414 करोड़ के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुये हैं।

भू-प्रबन्धन
हमारी सरकार ने भूमि सम्बन्धी प्रकरणों के त्‍वरित निराकरण के लिए राजस्‍व न्‍यायालयों में न्‍यायिक एवं गैर न्‍यायिक कार्यों के लिए पृथक-पृथक प्रशासनिक व्‍यवस्‍था की है। जियो फैंसिंग तकनीक से फसल गिरदावरी से किसानों को फसल क्षति की दश में राहत का लाभ समय पर मिल सकना संभव हुआ है। वर्ष 2025-26 में रुपये 2 हज़ार 68 करोड़ से अधिक की सहायता राशि वितरित की गई है। सायबर तहसील के माध्‍यम से नामांतरण की प्रक्रिया पूरी तरह पेपरलेस और फेसलेस की गई है। अब तक 6 लाख 26 हज़ार से अधिक नामांतरण प्रकरणों का निराकरण किया गया है।

शासकीय कार्यप्रणाली में नवाचार व सुधार
सुशासन का अर्थ नागरिक केंद्रित प्रशासन के माध्यम से पारदर्शिता के साथ लोक सेवाओं को जनता तक पहुँचाना है। हमारी सरकार सदैव नवीन एवं बेहतर प्रक्रियाओं को कार्यपद्धति में सम्मिलित करने में अग्रणी रही है। ई-केबिनेट एप्‍लीकेशन के माध्‍यम से मंत्रि-परिषद की कार्यवाही के लिए भी पेपरलेस व्‍यवस्‍था विकसित की गई है। अब मंत्रि-परिषद के सदस्‍यों को एजेंडा बिन्दु पर्याप्त समय पूर्व उपलब्‍ध हो रहे हैं जिससे निश्चित ही मंत्रि परिषद के विमर्श में सुविधा तथा गुणवत्‍ता में वृद्धि होगी।
हर्ष का विषय है कि नागरिकों को एक ही प्लेटफॉर्म पर नागरिक सुविधाएं उपलब्ध कराने की दृष्टि से एम.पी. ई-सेवा पोर्टल और मोबाईल एप प्रारंभ किया गया है, जिसके अंतर्गत विभिन्न विभागों की 600 से अधिक सेवाएँ एकीकृत की गई हैं। सी.एम. प्रगति पोर्टल के माध्‍यम से प्रमुख परियोजनाओं का अनुश्रवण किया जा रहा है।
शासकीय सेवा के एन.पी.एस. अभिदाताओं के हितलाभों की स्‍पष्‍टता के लिए एन्‍यूटी तथा उपदान के संदाय के नियम पृथक से बनाए गए हैं। अभिदाताओं के अंशदान निवेश विकल्प को और विस्‍तारित कर अंशदान की शत-प्रतिशत राशि को इक्विटी में निवेश की अधिकारिता उपलब्ध कराई गई है। विभिन्न विभागों द्वारा कोषालय में संचालित पी. डी. खातों का परिचालन सरल तथा बैंकिंग सुविधा के समतुल्य किया जा रहा है जिससे राज्य की निधि का बेहतर उपयोग तथा नागरिकों यथा भू-अर्जन हितग्राहियों को त्वरित भुगतान सम्भव होगा।
सेवानिवृत्ति स्‍वत्‍वों के त्वरित निर्धारण एवं भुगतान के लिए वर्तमान पेंशन नियमों को सरल एवं व्‍यावहारिक स्‍वरूप दिया जाकर नवीन नियम दिनांक 1 अप्रैल 2026 से प्रभावशील किए जा रहे हैं। मुझे यह अवगत कराते हुए हर्ष है कि हमारी संवेदनशील सरकार ने परिवार पेंशन की पात्रता अविवाहित, तलाकशुदा, विधवा पुत्री को भी प्रदान की है। पेंशन सम्बन्धी समस्त कार्यवाहियों में मानवीय हस्‍तक्षेप न्‍यूनतम कर इलेक्‍ट्रॉनिक प्रणाली के माध्‍यम से केन्‍द्रीकृत पेंशन व्यवस्था प्रारंभ की जा रही है।
शासकीय सेवकों के लिए लागू सेवा एवं वित्‍तीय नियमों को वर्तमान परिप्रेक्ष्‍य में प्रासंगिक तथा सुगम बनाने की कार्यवाही निरन्‍तर प्रचलित है। वित्‍तीय अधिकार पुस्तिका 13 वर्ष पश्‍चात, म.प्र. सिविल सेवा (अवकाश) नियम 48 वर्ष पश्‍चात तथा म.प्र. सिविल सेवा (पेंशन) नियम 49 वर्ष पश्‍चात, अद्यतन किए गए हैं। राष्‍ट्रीय पेंशन प्रणाली के लिए नियम जारी किए जा रहे हैं। एन.पी.एस. अभिदाताओं को अब परिवार पेंशन की पात्रता भी होगी। म.प्र. सिविल सेवा (आचरण) नियम तथा म.प्र. सिविल सेवा (सेवा की सामान्‍य शर्तें) नियम के अद्यतनीकरण की कार्यवाही प्रचलित है।
शासन में भिन्न-भिन्न सेवा शर्तें तथा पात्रताओं के पदों के भेद को समाप्त कर अब केवल नियमित पदों तथा आवश्यकतानुसार संविदा पदों की ही संरचना रखी जाने का निर्णय लिया गया है। इस निर्णय से शासकीय सेवकों को लाभ होगा तथा शासन को उनके हितलाभों के निर्णय लेने में सुविधा रहेगी।
शासकीय सेवकों की भविष्‍य निधि में जमा होने वाली राशियों के सटीक लेखांकन एवं त्वरित भुगतान के लिए ई-जी.पी.एफ एवं ई-डी.पी.एफ की प्रणाली विकसित की गई है। शासकीय कर्मचारी, सामान्य भविष्य निधि से नियमानुसार निर्धारित राशि का अग्रिम आहरण स्वयं कर सके, इस हेतु आवश्यक सुविधा विकसित की जाएगी। प्रदेश के लगभग 7 लाख कार्मिकों के वेतन देयकों का जनरेशन भी केन्‍द्रीकृत व्‍यवस्‍था से किया जा रहा है। इस व्‍यवस्‍था से सभी शासकीय सेवकों को प्रतिमाह नियत तिथि पर वेतन प्राप्‍त होना सुनिश्चित हुआ है। व्‍यक्तिगत एवं हितग्राहियों को किए जाने वाले भुगतानों को सहज, पारदर्शी तथा त्रुटिहीन बनाने के लिए डिजिटल करेन्‍सी प्रणाली (सी.बी.डी.सी.) को सफलतापूर्वक लागू किया गया है।
माननीय महोदय, मैं आपके माध्‍यम से प्रदेश के समस्‍त शासकीय, अर्द्धशासकीय एवं स्‍वायत्‍त संस्‍थानों में कार्यरत कार्मिकों का आभार व धन्‍यवाद करना चाहूँगा कि शासन के सभी कार्यक्रमों एवं योजनाओं में उनका सराहनीय योगदान सदैव प्राप्‍त होता है।

कर-प्रस्ताव
गत वर्ष के बजट की तरह इस बजट में भी कोई नवीन कर अधिरोपित करने अथवा किसी भी कर की दर बढ़ाने का प्रस्ताव नहीं है।

राज्य का सकल घरेलू उत्पाद
प्रदेश के सकल घरेलू उत्पाद में वर्ष 2011-12 से वर्ष 2025-26 की अवधि में प्रचलित भावों पर औसतन 12.73 प्रतिशत की वृद्धि दर परिलक्षित है। वर्ष 2025-26 हेतु राज्य के सकल घरेलू उत्पाद का पुनरीक्षित अनुमान रुपये 16 लाख 69 हज़ार 750 करोड़ है, जो वर्ष 2024-25 से रुपये 1 लाख 67 हज़ार 322 करोड़ अधिक है।

पुनरीक्षित अनुमान वर्ष 2025-26
वित्त वर्ष 2025-26 के पुनरीक्षित अनुमान के अनुसार कुल राजस्व प्राप्तियाँ रुपये 2 लाख 79 हज़ार 233 करोड़ तथा राजस्व व्यय रुपये 2 लाख 79 हज़ार 226 करोड़ अनुमानित हैं। राजस्व आधिक्य का पुनरीक्षित अनुमान रुपये 7 करोड़ 26 लाख है।
राजकोषीय घाटे का पुनरीक्षित अनुमान रुपए 74 हज़ार 323 करोड़ है, जो सकल राज्य घरेलू उत्पाद का 4.45 प्रतिशत है। पूँजीगत निवेश की विशेष सहायता योजना अंतर्गत भारत सरकार से प्राप्त ऋण तथा वित्तीय वर्ष 2021-22 से 2024-25 की अवधि की अनुपयोगित ऋण सीमा की राशि, राजकोषीय घाटे की निर्धारित सीमा 3 प्रतिशत के अतिरिक्त है। इन राशियों का सकल राज्य घरेलू उत्पाद से प्रतिशत क्रमशः 0.81 एवं 0.64 है। इन अतिरिक्त प्रावधानों को अलग रखने पर राजकोषीय घाटा 3 प्रतिशत की निर्धारित सीमा के अनुरूप है, जो केंद्रीय वित्त आयोग के दिशा-निर्देशों के प्रति राज्य की प्रतिबद्धता और अनुपालन को दर्शाता है।

बजट अनुमान वर्ष 2026-27
वर्ष 2025-26 के पुनरीक्षित बजट अनुमान की तुलना में वर्ष 2026-27 के लिये प्रस्तुत किए जा रहे बजट के आकार में 11 प्रतिशत तथा राज्‍य के सकल घरेलू उत्‍पाद में 10.69 प्रतिशत की वृद्धि है।

राजस्व प्राप्तियाँ
वर्ष 2026-27 में कुल राजस्व प्राप्तियों का बजट अनुमान रुपए 3 लाख 8 हज़ार 703 करोड़ है। राजस्व प्राप्तियों में राज्य करों से प्राप्तियाँ रुपए 1 लाख 17 हज़ार 667 करोड़ तथा केन्द्रीय करों में प्रदेश के हिस्से के अंतर्गत प्राप्तियाँ रुपए 1 लाख 12 हज़ार 137 करोड़ अनुमानित हैं। कर भिन्न राजस्व प्राप्तियाँ रुपए 24 हज़ार 394 करोड़ तथा केन्द्र सरकार से सहायक अनुदान अंतर्गत प्राप्तियाँ रुपए 54 हज़ार 504 करोड़ अनुमानित हैं।
वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए प्रदेश के स्वयं का कर राजस्व एवं गैर कर राजस्व, वर्ष 2025-26 के पुनरीक्षित बजट अनुमान की तुलना में क्रमश: 17.64 प्रतिशत एवं 0.47 प्रतिशत अधिक होने का अनुमान है।
राजस्व प्राप्तियों का वर्ष 2025-26 का पुनरीक्षित बजट अनुमान रुपए 2 लाख 79 हज़ार 234 करोड़ है, जिसमें रुपए 29 हज़ार 469 करोड़ की वृद्धि के साथ वर्ष 2026-27 के लिये रुपए 3 लाख 8 हज़ार 703 करोड़ का प्रावधान प्रस्तावित है।

विनियोग एवं व्यय
वर्ष 2026-27 के लिये कुल विनियोग की राशि रुपए 4 लाख 38 हज़ार 317 करोड़, राजस्व व्यय रुपए 3 लाख 8 हज़ार 659 करोड़ तथा पूंजीगत परिव्यय रुपए 80 हज़ार 266 करोड़ प्रस्तावित है। सामाजिक, आर्थिक उत्थान की योजनाओं के लिये वर्ष 2026-27 के लिये समग्र रूप से बजट अनुमान रुपए 1 लाख 83 हज़ार 708 करोड़ है, जिसमें अनुसूचित जनजाति तथा अनुसूचित जाति वर्ग के लिए बजट में क्रमशः 26 प्रतिशत तथा 17 प्रतिशत राशि प्रावधानित है।
वर्ष 2025-26 का कुल व्यय का पुनरीक्षित बजट अनुमान रुपए 3 लाख 53 हज़ार 889 करोड़ का है, जिसमें रुपए 35 हज़ार 36 करोड़ की वृद्धि के साथ वर्ष 2026-27 के लिये रुपए 3 लाख 88 हज़ार 925 करोड़ का प्रावधान प्रस्तावित है।

शुद्ध लेन-देन
शुद्ध लेन-देन के लिये वर्ष 2025-26 का पुनरीक्षित बजट अनुमान रुपए 54 करोड़ 20 लाख का है। वर्ष 2026-27 की कुल प्राप्तियां रुपए 3 लाख 89 हज़ार 397 करोड़ तथा कुल व्यय रुपए 3 लाख 88 हज़ार 925 करोड़ अनुमानित होने से वर्ष 2026-27 का शुद्ध लेन-देन रुपये 472 करोड़ अनुमानित है।

राजकोषीय स्थिति
राजकोषीय घाटे की सामान्य सीमा राज्य के सकल घरेलू उत्पाद की 3 प्रतिशत, निर्धारित है। भारत सरकार द्वारा पूँजीगत निवेश के लिए राज्यों को विशेष सहायता योजना में वर्ष 2026-27 के लिये रुपये 16 हज़ार 200 करोड़ दीर्घकालिक ब्याज रहित ऋण सहायता (राज्य के सकल घरेलू उत्पाद का 0.87 प्रतिशत) प्राप्त होने का अनुमान है, जो राजकोषीय घाटे की सीमा से पृथक है।
महोदय, मैं माननीय मुख्‍यमंत्री जी, मंत्रि-परिषद के साथियों, माननीय विधायकों, उद्योग जगत के महानुभावों तथा अर्थशास्त्रियों का आभारी हूँ जिनके परामर्श से बजट प्रस्ताव को विकासोन्‍मुखी तथा कल्‍याणकारी स्‍वरूप दिया जा सका है। मैं वित्‍त विभाग के समस्‍त अधिकारियों एवं कर्मचारियों का भी आभारी हूँ जिन्‍होंने अथक परिश्रम एवं प्रतिबद्धता से बजट को तैयार कर प्रस्‍तुत करने तक की प्रक्रिया में प्रशंसनीय सहयोग दिया है।
वर्ष 2026-27 का यह बजट प्रदेश की समस्त जनता-जनार्दन की आकांक्षाओं, अपेक्षाओं, अभिलाषाओं और अंतरात्‍मा की आवाज का प्रतिबिंब है। यह केवल आय और व्‍यय का लेखा-जोखा नहीं, बल्कि 21वीं सदी के आत्‍म-निर्भर मध्‍यप्रदेश के निर्माण का भविष्य लेख है। इन प्रस्‍तावों में परम्‍परा बोध है तो परम्‍परा का परिमार्जन भी है। यह आज का है परंतु अतीत को खँगालता है और भविष्य में झाँकता है।
महोदय, आखिर सरकार किसे कहते हैं? सरकारें होती किसलिए हैं? सरकार वही है जो सुख-दुख में जनता के साथ खड़ी रहे, सरकार वही है जो विकास और जनकल्‍याण के बिना एक पल भी चैन की साँस न ले, सरकार वही है जो नागरिकों का जीवन सुगम और आनन्‍दमय बना दे, सरकार वही है जो जन-जन की जिन्‍दगी को बदल दे, और हमारी सरकार ऐसी ही सरकार है।
आज इस सुअवसर पर मैं, प्रदेश की जनता का आभार व्‍यक्‍त करते हुये कहना चाहूँगा कि:-
“आंखों में भावी सपनों की झिल-मिल है,
अभी हमको तय करनी एक मंजिल है।
अम्‍बर तक जाने की अभिलाषायें हैं,
विकसित मध्‍यप्रदेश की आशायें हैं”

मध्यप्रदेश के उपमुख्यमंत्री, वित्त श्री जगदीश देवड़ा ने राज्य का वित्तीय वर्ष 2026-27 का बजट प्रस्ताव सदन में पेश करते कहा की प्रदेश की जनता को मैं इन शब्‍दों के साथ समर्पित करता हूँ कि–
दीप बन जलते रहें, पुष्‍प बन खिलते रहें।
लोक मंगल के लिए, चलते रहें-चलते रहें।।
जय हिन्द, जय मध्यप्रदेश
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