
” भारत ने एक ऐसा ऐतिहासिक अध्याय लिखा है जिसकी कल्पनाशीलता एक ऐसे राजनेता ने की जिसके नतीजे भी उन्ही की लीडर शिप में न केवल सामने आने लगे हैं बल्कि डिजिटल लोकतंत्र का नया अध्याय तो लिखा गया ही है साथ में इंडिया की टेक्नोलॉजी ट्रांसफॉर्मेशन सबसे बड़ी पहचान भी बनी है, क्योंकि इससे शासन, वित्तीय समावेशन और नागरिक भागीदारी तीनों बदले हैं। डायलअप इंटरनेट से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस – AI, क्लाउड और डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर तक, टेक्नोलॉजी को जन सशक्तिकरण का सबसे बड़ा बुनियादी आधार बनाया गया है। यही हैं भारत के डिजिटल लोकतंत्र और डिजिटल क्रांति के प्रमुख प्रयास। जहाँ भारतीय नागरिकों के लिए टेक्नोलॉजी बनी समान अवसर, पारदर्शिता और आत्मनिर्भर भारत की नई ताकत, वहीं UPI, DPI, AI और डिजिटल इंडिया के जरिए दुनिया को नया टेक्नोलॉजी मॉडल देता दिखा भारत। भारत ने डिजिटल तकनीक को सिर्फ सुविधा नहीं, बल्कि समानता, पारदर्शिता और पहुंच का माध्यम बनाया है।”
” वैसे आज से दस साल पहले, भारत ने बहुत दृढ़ विश्वास के साथ अज्ञात क्षेत्र में एक साहसिक यात्रा शुरू की थी, जबकि दशकों तक भारतीयों की, टेक्नोलॉजी का उपयोग करने की क्षमता पर संदेह किया जाता रहा, इस अप्रोच को भारत ने और यहाँ के प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व ने बदल दिया और भारतीयों की, टेक्नोलॉजी का उपयोग करने की क्षमता पर भरोसा स्थापित किया। दशकों तक यह सोचा जाता रहा कि टेक्नोलॉजी के उपयोग से संपन्न और वंचित के बीच की खाई और गहरी हो जाएगी, इंडिया के प्रधानमंत्री ने इस मानसिकता को न केवल बदल दिया वरन संपन्न एवं वंचित के बीच की खाई को खत्म करने के लिए टेक्नोलॉजी के उपयोग करने का एक ऐसा खाका खींचा की सब निहारते रह गए और भारत वैश्विक लीडर के रूप में तब एका एक उभरकर सामने आया जब इंडिया AI इम्पैक्ट समिट 2026, शिखर सम्मेलन के नई दिल्ली घोषणा पत्र को 91 देशों और अंतरराष्ट्रीय संगठनों ने अपनाने के साथ समर्थन दिया। यह आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर वैश्विक सहयोग में महत्वपूर्ण मील का पत्थर है। 91 देशों और अंतरराष्ट्रीय संगठनों द्वारा समर्थन देना इस पक्ष को विशेष रूप से रेखांकित करता है की इससे आर्थिक विकास और सामाजिक भलाई के लिए एआई का फ़ायदा उठाने पर बड़ी ग्लोबल सहमति को दर्शाता है।”
यहाँ यह उल्लेख करना न केवल सामयिक होगा बल्कि समीचीन भी होगा की जिस समय फिनलैंड की ओर से भारतीय पेशेवरों द्वारा फिनलैंड के प्रौद्योगिकी सेक्टर के विकास और नवाचार में किए गए महत्वपूर्ण योगदान की सराहना की जा रही थी, डिजिटलीकरण की महत्वपूर्ण भूमिका को प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी रेखांकित करते हुए , डिजिटलीकरण, AI – कृत्रिम बुद्धिमत्ता, 5जी, 6जी, क्वांटम प्रौद्योगिकियों, नवाचार, गतिशीलता और लोगों के बीच परस्पर क्षेत्रों में जारी सहयोग की 19 मई 2026 को फिनलैंड में समीक्षा कर रहे थे, ठीक उसी समय भारत डिजिटल लोकतंत्र का नया अध्याय, ‘ए आई फॉर आल – AI for All’ और AI का लोकतंत्रीकरण की दिशा में तेज़ी के साथ आगे लीड करता हुआ दिखा।
जब इरादा सही हो, तो इनोवेशन, कम सशक्त लोगों को सशक्त बनाता है। जब अप्रोच, समावेशी होता है, तो टेक्नोलॉजी; हाशिये पर रहने वालों के जीवन में बदलाव लाती है।” जो हकीकत में तब्दील हो चुकी है।”
“एक समय ऐसा भी था जब दुनिया भारत की तकनीकी क्षमता पर संदेह करती थी और माना जाता था कि तकनीक केवल अमीरों और गरीबों के बीच की खाई को बढ़ाएगी। लेकिन पिछले दशक में, भारत ने इस धारणा को पूरी तरह बदल दिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के शब्दों में, यह यात्रा केवल कोड और कंप्यूटर की नहीं है, बल्कि 140 करोड़ से अधिक भारतीयों के भरोसे और साहस की डिजिटल यात्रा है। विचार से विजन तक की यह ‘टेक्नोलॉजी क्रांति’ आज गलियों के रेहड़ी-पटरी वालों से लेकर सियाचिन की बर्फीली चोटियों तक पहुँच चुकी है। कैसे एक ‘साहसिक यात्रा’ ने भारत को तकनीक के उपभोक्ता से बदलकर दुनिया का एक विश्वसनीय ‘इनोवेशन पार्टनर’ बना दिया है।”
इंडिया AI इम्पैक्ट समिट 2026, देश की राजधानी दिल्ली में हाल ही में संपन्न हुआ है । यह पहली बार हुआ जब ग्लोबल साउथ में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर इतने बड़े लेवल पर कोई ग्लोबल मीटिंग हुई । प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने इस समिट के सन्दर्भ में जो विचार रखे थे वे हैं “सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय”। इस समिट में विभिन्न देशों के राष्ट्राध्यक्ष और सरकार प्रमुख, मंत्री, ग्लोबल टेक्नोलॉजी लीडर्स नेता और उद्योग जगत के प्रतिनिधि शामिल हुए । समिट में शामिल स्टेक होल्डर ने इस बात पर चर्चा कि की AI का इस्तेमाल कैसे समावेशी विकास को आगे बढ़ाया जाये, सार्वजनिक व्यवस्थाओं को मजबूत करने और सतत विकास को गति देने में किया जाये।
प्रधानमंत्री मोदी का मत रहा की इस नए युग के लिए भारत के विजन पर जोर देते हुए कहा कि AI को पूरी तरह से ह्यूमन-सेंट्रिक रहते हुए ग्लोबल डेवलपमेंट को तेज करना चाहिए।
फिर सन्दर्भ तसदीक करता है “लोकतंत्र और तकनीक का महासंगम” की “भारत की डिजिटल क्रांति अब केवल डेटा और डैशबोर्ड का आँकड़ा नहीं रहा बल्कि अवसरों के लोकतंत्रीकरण की एक जीवंत गाथा है। भारत सरकार का ‘डिजिटल इंडिया’ अब महज एक सरकारी कार्यक्रम नहीं रहा , बल्कि एक राष्ट्रव्यापी जन-आंदोलन बन चुका है जिसने बिचौलियों को हटाकर सीधे नागरिकों को सशक्त किया है। जब इरादा सही हो और अप्रोच समावेशी हो, तो तकनीक हाशिये पर रहने वालों के जीवन में उजाला लाती ही है जो चहुँओर दिख भी रही है ।
“इंडिया-फर्स्ट’ से ‘इंडिया-फॉर-द-वर्ल्ड’ की ओर बढ़ते भारत के इस सफर में, नागरिक न केवल अपनी समस्याओं का समाधान कर रहे हैं, बल्कि मानवता-प्रथम (Humanity-first) एआई के माध्यम से वैश्विक नेतृत्व की नई इबारत लिख रहे हैं।”
अब गौर कीजिये मानसिकता में बदलाव पर तो पाएंगे की भारतीयों की तकनीकी क्षमता पर संदेह को भरोसे में बदलना, समावेशी विकास, संपन्न और वंचित के बीच की खाई को पाटना।
भारत का ‘इंडिया-फॉर-द-वर्ल्ड’ का लक्ष्य और वैश्विक डिजिटल लीडर बनना लोकतंत्रीकरण की दिशा का अहम पड़ाव कैसे आकर ले रहा : छोटे उद्यमियों और आम आदमी को वैश्विक बाजार (GeM और ONDC) से जोड़ना, वैश्विक नेतृत्व: भारत का ‘इंडिया-फॉर-द-वर्ल्ड’ का लक्ष्य और वैश्विक डिजिटल लीडर बनना। इस विश्वास ने डिजिटल इंडिया की नींव रखी, पहुँच को लोकतांत्रिक बनाने, समावेशी डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर का निर्माण करने और सभी के लिए अवसर प्रदान करने का मिशन।
यह आंकड़े बताते हैं 2014 में, इंटरनेट की पहुंच सीमित थी, डिजिटल साक्षरता कम थी और सरकारी सेवाओं तक ऑनलाइन पहुंच दुर्लभ थी। कई लोगों को संदेह था कि क्या भारत जैसा विशाल और विविधता पूर्ण देश वास्तव में डिजिटल हो सकता है।
आज, उस सवाल का जवाब न केवल डेटा और डैशबोर्ड में है, बल्कि 140 करोड़ से अधिक भारतीयों के जीवन में भी है। लोग कैसे गवर्न करते हैं, कैसे सीखते हैं, कैसे लेन-देन करते हैं और कैसे निर्माण करते हैं, डिजिटल इंडिया हर जगह है। विश्वास न हो तो किसी, सब्जी मार्केट, हाट बाजार अथवा ऐसे मार्केट में जाकर स्वयं अनुभव कर लें जहाँ पैसे का लेन देन QR कोड के जरिये हो रहा हो और पेमेंट होने का प्रमाण आवाज के सहारे मिल रहा हो।
डिजिटल खाई को पाटना:
मार्च 2026 के अंत तक भारत में कुल ब्रॉडबैंड इंटरनेट ग्राहकों की संख्या बढ़कर 106.58 करोड़ (1,065.88 मिलियन) हो गई। यह अभूतपूर्व बढ़ोत्तरी है।
42 लाख किलोमीटर से ज़्यादा ऑप्टिकल फाइबर केबल, जो पृथ्वी और चंद्रमा के बीच की दूरी से 11 गुना ज़्यादा है, अब सबसे दूरदराज के गांवों को भी जोड़ती है।
भारत में 5G की शुरुआत दुनिया में सबसे तेज़ गति से हुई है, जहाँ सिर्फ़ दो साल में 4.81 लाख बेस स्टेशन स्थापित किए गए हैं। हाई-स्पीड इंटरनेट अब शहरी केंद्रों और गलवान, सियाचिन और लद्दाख सहित अग्रिम सैन्य चौकियों तक पहुँच गया है।
इंडिया स्टैक, जो हमारी डिजिटल रीढ़ है, ने UPI जैसे प्लेटफ़ॉर्म को सक्षम किया है, जो अब सालाना 100+ बिलियन लेनदेन को संभालता है। सभी वास्तविक समय के डिजिटल लेनदेन में से लगभग आधे भारत में होते हैं।
Direct Benefit Transfer (DBT) के माध्यम से, रुपये 44 लाख करोड़ से अधिक सीधे नागरिकों को ट्रांसफर किए गए हैं, जिससे बिचौलियों को हटाया गया है और रुपये 3.48 लाख करोड़ की लीकेज की बचत हुई है।
SVAMITVA जैसी योजनाओं ने 2.4 करोड़ से अधिक संपत्ति कार्ड जारी किए हैं और 6.47 लाख गांवों की मैपिंग की है, जिससे भूमि से संबंधित अनिश्चितता के वर्षों का अंत हुआ है।
सभी के लिए अवसर का लोकतंत्रीकरण:
भारत की डिजिटल अर्थव्यवस्था MSMEs और छोटे उद्यमियों को पहले से कहीं ज़्यादा सशक्त बना रही है।
ONDC (डिजिटल कॉमर्स के लिए ओपन नेटवर्क) एक क्रांतिकारी प्लेटफ़ॉर्म है जो खरीदारों और विक्रेताओं के विशाल बाज़ार के साथ सहज कनेक्शन प्रदान करके अवसरों की एक नई खिड़की खोलता है।
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GeM (गवर्नमेंट ई-मार्केटप्लेस) आम आदमी को सरकार के सभी अंगों को सामान और सेवाएँ बेचने में सक्षम बनाता है। यह न केवल आम आदमी को एक विशाल बाज़ार के साथ सशक्त बनाता है बल्कि सरकार के लिए पैसे भी बचाता है।
कल्पना कीजिए: आप मुद्रा लोन के लिए ऑनलाइन आवेदन करते हैं। अकाउंट एग्रीगेटर फ्रेमवर्क के ज़रिए आपकी क्रेडिट योग्यता का मूल्यांकन किया जाता है। आपको अपना लोन मिल जाता है और आप अपना उद्यम शुरू कर देते हैं। आप GeM पर रजिस्टर होते हैं, स्कूलों और अस्पतालों को सप्लाई करते हैं और फिर ONDC के ज़रिए आगे बढ़ते हैं।
ONDC ने हाल ही में 200 मिलियन ट्रांज़ेक्शन को पार कर लिया है, जिसमें से आखिरी 100 मिलियन ट्रांज़ेक्शन सिर्फ़ छह महीनों में हुए हैं। बनारसी बुनकरों से लेकर नागालैंड के बांस कारीगरों तक, विक्रेता अब बिना किसी बिचौलिए या डिजिटल एकाधिकार के, पूरे देश में ग्राहकों तक पहुँच रहे हैं।
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GeM ने 50 दिनों में रुपये 1 लाख करोड़ GMV को भी पार कर लिया है, जिसमें 1.8 लाख से अधिक महिलाओं के नेतृत्व वाले MSME सहित 22 लाख विक्रेताओं ने रुपये 46,000 करोड़ के ऑर्डर पूरे किए हैं।
डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर: भारत की ग्लोबल ऑफरिंग
आधार, कोविन, डिजीलॉकर और फास्टैग से लेकर पीएम-वाणी और वन नेशन वन सब्सक्रिप्शन तक भारत के डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (DPI) का अब वैश्विक स्तर पर अध्ययन और अपनाया जा रहा है।
कोविन ने दुनिया के सबसे बड़े टीकाकरण अभियान को सक्षम बनाया, 220 करोड़ QR-verifiable प्रमाणपत्र जारी किए। 54 करोड़ यूजर्स के साथ डिजीलॉकर 775 करोड़ से अधिक दस्तावेजों को सुरक्षित और निर्बाध रूप से होस्ट करता है।
G20 प्रेसीडेंसी के माध्यम से, भारत ने ग्लोबल DPI रिपॉजिटरी और $25 मिलियन का सोशल इम्पैक्ट फंड लॉन्च किया, जिससे अफ्रीका और दक्षिण एशिया के देशों को समावेशी डिजिटल इकोसिस्टम अपनाने में मदद मिली।
स्टार्टअप पावर और आत्मनिर्भर भारत का संगम:
भारत अब दुनिया के शीर्ष 3 स्टार्टअप इकोसिस्टम में शुमार है, जहाँ 1.8 लाख से ज़्यादा स्टार्टअप हैं। लेकिन यह सिर्फ़ स्टार्टअप मूवमेंट से कहीं ज़्यादा है, यह एक तकनीकी पुनर्जागरण है।
जब बात युवाओं में एआई स्किल पैठ और एआई talent concentration की आती है तो भारत बहुत अच्छा प्रदर्शन कर रहा है।
1.2 बिलियन डॉलर के India AI Mission के माध्यम से, भारत ने 34,000 जीपीयू तक वैश्विक स्तर पर बेजोड़ कीमतों पर 1 डॉलर, जीपीयू प्रति घंटे से भी कम कीमत पर पहुंच को सक्षम किया है, जिससे भारत न केवल सबसे किफायती इंटरनेट अर्थव्यवस्था बन गया है, बल्कि सबसे किफायती कंप्यूट डेस्टिनेशन भी बन गया है।
भारत ने humanity-first AI का समर्थन किया है। एआई पर New Delhi Declaration जिम्मेदारी के साथ इनोवेशन को बढ़ावा देती है। इंडिया में AI Centres of Excellence स्थापित करने की प्रक्रिया प्रारंभ हो चुकी है।
आगे की राह:
अगला दशक और भी अधिक परिवर्तनकारी होगा। हम डिजिटल गवर्नेंस से ग्लोबल डिजिटल नेतृत्व की ओर, India-first से India-for-the-world की ओर बढ़ रहे हैं।
डिजिटल इंडिया, केवल एक सरकारी कार्यक्रम नहीं रह गया है, यह लोगों का आंदोलन बन गया है। यह एक आत्मनिर्भर भारत के निर्माण और भारत को दुनिया के लिए एक विश्वसनीय इनोवेशन भागीदार बनाने के लिए अहम है।
सभी इनोवेटर्स, उद्यमियों और सपने देखने वालों के लिए दुनिया, अगली डिजिटल सफलता के लिए भारत की ओर देख रही है।
कभी भारत में इंटरनेट का मतलब टेलीफोन की डायल टोन, धीमी स्पीड और सीमित पहुँच हुआ करता था। तकनीक को शहरों, अंग्रेज़ी और संपन्न वर्ग तक सीमित माना जाता था। यह धारणा भी गहरी थी कि डिजिटल दुनिया, समाज में बराबरी नहीं बल्कि असमानता को और बढ़ाएगी। लेकिन एक दशक पहले शुरू हुई एक सोच ने इस मानसिकता को पूरी तरह बदल दिया।
भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा समय -समय पर लिखे गए ब्लॉग, लेखों और सार्वजनिक विचारों का गहन अध्ययन बताता है कि भारत की डिजिटल यात्रा केवल तकनीकी बदलाव की कहानी नहीं है, बल्कि यह विश्वास, समावेशन और लोकतांत्रिक सशक्तिकरण की नई परिभाषा है। यह वह विज़न था जिसमें तकनीक को “एलीट टूल” नहीं बल्कि “जनसशक्तिकरण का माध्यम” माना गया।
डिजिटल इंडिया की अवधारणा ने पहली बार टेक्नोलॉजी को आम भारतीय के हाथ में रखा – गांव की महिला से लेकर छोटे दुकानदार तक, स्टार्टअप युवा से लेकर सीमावर्ती सैनिक तक। यही कारण है कि आज भारत केवल डिजिटल उपभोक्ता नहीं, बल्कि दुनिया को डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर, UPI, DPI, AI और समावेशी टेक्नोलॉजी मॉडल देने वाला वैश्विक नेतृत्व कर्ता बनकर उभर रहा है।
प्रधानमंत्री श्री मोदी के लेखों और ब्लॉग में बार-बार एक बात स्पष्ट दिखाई देती है -“जब इरादा समावेशी हो, तो तकनीक केवल सुविधा नहीं देती, बल्कि समाज की दिशा बदल देती है।” फ्लॉपी और डायलअप इंटरनेट के दौर से लेकर AI, 5G, ONDC और India AI Mission तक पहुँची यह यात्रा, दरअसल नए भारत की तकनीकी आत्मनिर्भरता और वैश्विक डिजिटल नेतृत्व की कहानी है।
भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समय-समय पर अपने ब्लॉग पर और अन्य लिखे गए लेखों के माध्यम से देश के सामने भविष्य की दिशा, विकास की प्राथमिकताएँ और तकनीक आधारित परिवर्तन की सोच नागरिकों के समक्ष समर्पित करते रहे हैं। उनके अनेक ब्लॉग में डिजिटल इंडिया, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, स्टार्टअप, इनोवेशन, डेटा, सेमीकंडक्टर, 5G, डिजिटल गवर्नेंस और तकनीक आधारित जनसेवा सरीखे विषय लगातार उभरकर सामने आते हैं। प्रधानमंत्री श्री मोदी ने अपने लेखों में बार-बार इस बात पर जोर दिया है कि टेक्नोलॉजी केवल सुविधा का माध्यम नहीं, बल्कि सामाजिक परिवर्तन और लोकतांत्रिक सशक्तिकरण का सबसे बड़ा उपकरण है। उनका मानना रहा है कि भारत का भविष्य डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर, डेटा आधारित प्रशासन और युवा इनोवेशन पर आधारित होगा।
डिजिटल इंडिया : तकनीक को जन आंदोलन बनाने का प्रयास :
प्रधानमंत्री श्री मोदी ने अपने कई ब्लॉग और लेखों में डिजिटल इंडिया को केवल सरकारी कार्यक्रम नहीं, बल्कि सामाजिक और आर्थिक बदलाव का अभियान बताया। उनके अनुसार डिजिटल टेक्नोलॉजी ने गांव और शहर के बीच की दूरी कम की है। UPI, डिजिलॉकर, आधार, कोविन और डिजिटल पेमेंट जैसे प्लेटफॉर्म को उन्होंने भारत की नई पहचान बताया।
स्टार्टअप और इनोवेशन : युवा भारत की नई ताकत :
अपने लेखों में प्रधानमंत्री ने भारत के युवाओं को ‘जॉब सीकर’ से ‘जॉब क्रिएटर’ बनने की प्रेरणा दी। उन्होंने स्टार्टअप इंडिया अभियान को देश की नई ऊर्जा बताया। AI, फिनटेक, हेल्थटेक, एग्रीटेक और डीप टेक स्टार्टअप्स को उन्होंने आत्मनिर्भर भारत का आधार माना।
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और भविष्य का भारत:
प्रधानमंत्री श्री मोदी ने AI को भविष्य की सबसे बड़ी परिवर्तनकारी तकनीक बताया है। उनके विचारों में AI केवल उद्योग के लिए नहीं, बल्कि शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि और प्रशासन के लिए भी क्रांतिकारी भूमिका निभा सकता है। उन्होंने ‘AI for All’ की अवधारणा को बढ़ावा दिया और भारत को जिम्मेदार AI विकास का समर्थक बताया। AI का लोकतंत्रीकरण करने की दिशा में प्रधानमंत्री श्री मोदी की अग्रणीय भूमिका वैश्विक स्तर पर उभरकर परिलक्षित हुई है।
5G, सेमीकंडक्टर और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर:
प्रधानमंत्री श्री मोदी के ब्लॉग में 5G और सेमीकंडक्टर मिशन को भविष्य की अर्थव्यवस्था का इंजन बताया गया। प्रधानमंत्री का मानना है कि डेटा, कनेक्टिविटी और चिप निर्माण आने वाले समय में वैश्विक शक्ति संतुलन तय करेंगे। भारत को टेक्नोलॉजी निर्माता राष्ट्र बनाने की दिशा में सरकार लगातार निवेश और नीति सुधार कर रही है।
डिजिटल गवर्नेंस : पारदर्शिता और गति:
प्रधानमंत्री श्री मोदी ने तकनीक आधारित प्रशासन को सुशासन का नया मॉडल बताया। उनके अनुसार तकनीक ने भ्रष्टाचार कम किया, सेवाओं की गति बढ़ाई और आम नागरिक को सीधे शासन से जोड़ा। DBT, ऑनलाइन सेवाएँ और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स को उन्होंने ‘Minimum Government, Maximum Governance’ की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना।
भारत के प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के ब्लॉग https://www.narendramodi.in/hi/blog और लेखों का अध्ययन करने पर स्पष्ट होता है कि उनकी विकास दृष्टि में टेक्नोलॉजी केंद्र में है। उन्होंने डिजिटल भारत को केवल तकनीकी परियोजना नहीं, बल्कि सामाजिक परिवर्तन, पारदर्शिता, आत्मनिर्भरता और वैश्विक नेतृत्व का माध्यम माना है। भारत आज दुनिया में डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर का मॉडल बन चुका है। आने वाले वर्षों में AI, क्वांटम टेक्नोलॉजी, सेमीकंडक्टर और डिजिटल इनोवेशन भारत की नई पहचान बन सकते हैं। प्रधानमंत्री मोदी के ब्लॉग इस बात का संकेत देते हैं कि भारत केवल तकनीक का उपभोक्ता नहीं, बल्कि भविष्य का तकनीकी नेतृत्व कर्ता बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। अगला दशक नवाचारों से भरपूर, रचनात्मकता शीतलता से परिपूर्ण और भी अधिक परिवर्तन कारी होगा। ऐसे ताने – बाने बुने जा चुके हैं। इसके साक्षी बनने में अब ज्यादा समय नहीं लगेगा। क्योंकि शासन, प्रशासन, टेक्नोक्रैट, एक्सपर्ट, स्टेक होल्डर और भारत का जागरूक समाज मुस्तैदी से अपने -अपने स्तर पर योगदान दे रहा है।
( लेखक : मध्यप्रदेश की पहली न्यूज़ पोर्टल एमपी पोस्ट के फाउंडर एडिटर, डिजिटल एमपी पुस्तक के रचयिता हैं और डिजिटल जर्नलिज्म से पिछले 25 वर्षों से जुड़े हैं )