लंदन में ‘फ्रेंड्स ऑफ इंडिया सोसाइटी’ (FISI UK) का स्वर्ण जयंती समारोह 28 जून को : भारत-ब्रिटेन संबंधों के 50 वर्ष पूर्ण
प्रवासी भारतीय समुदाय: नया रणनीतिक फ्रंट

लंदन। ब्रिटेन में भारत की सबसे प्रभावशाली और विश्वसनीय आवाजों में से एक, ‘फ्रेंड्स ऑफ इंडिया सोसाइटी इंटरनेशनल यूके’ (FISI UK) आगामी 28 जून को वेस्ट केंसिंग्टन स्थित प्रतिष्ठित सांस्कृतिक केंद्र ‘द भवांस’ में अपने गौरवशाली 50 वर्ष पूरे होने पर स्वर्ण जयंती समारोह मनाने जा रहा है। इस ऐतिहासिक अवसर पर ब्रिटेन और यूरोप के कई सांसदों, राजनयिकों, नीति विशेषज्ञों और प्रवासी समुदाय के नेतागण शिरकत करेंगें।
FISI UK-फिसि यूके के प्रेसीडेंट मधुरेश मिश्रा और मीडिया कोऑर्डिनेटर विनय पुजारी ने बताया की फिसि यूके का सफर आपातकाल के दौर से प्रारंभ होकर वैश्विक पहचान बना चुका है:
वर्ष 1976 में जब प्रतिबद्ध प्रवासी भारतीय कार्यकर्ताओं के एक छोटे से समूह ने FISI UK की स्थापना की थी, तब वैश्विक परिदृश्य बिल्कुल अलग था। भारत तब आपातकाल (Emergency) के दौर से गुजर रहा था और ब्रिटेन में भारतीय प्रवासियों की राजनीतिक आवाज न के बराबर थी, लेकिन पिछले पांच दशकों में, इस संगठन ने सत्य, सत्यनिष्ठा और एकजुटता के मूल सिद्धांतों पर चलते हुए ब्रिटिश संसद (Westminster) में भारत के पक्ष में एक मजबूत नैरेटिव स्थापित किया है।
एक ऐतिहासिक मोड़ पर स्वर्ण जयंती:
FISI UK का यह 50वां स्थापना वर्ष एक ऐसे ऐतिहासिक मोड़ पर आया है, जब भारत और यूके के बीच ऐतिहासिक ‘व्यापक आर्थिक और व्यापार समझौता’ (Comprehensive Economic and Trade Agreement) आगामी 15 जुलाई 2026 से लागू होने जा रहा है। यह समझौता दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार को सालाना £25 बिलियन (25 अरब पाउंड) से अधिक बढ़ाएगा। भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा परिभाषित भारत-यूके के “लिविंग ब्रिज” (जीवंत सेतु) को मजबूत करने में 19 लाख (1.9 मिलियन) ब्रिटिश-भारतीय प्रवासियों की भूमिका अहम रही है, और FISI UK इस सेतु का एक मुख्य शिल्पकार रहा है।
25th June 1975. A date etched in India's democratic memory.
On this day, the Emergency was declared, press censored, civil liberties suspended, thousands imprisoned without trial.
It was the darkest chapter in independent India's history.Out of that darkness, FISI UK was born… pic.twitter.com/REjDlt0C9t
— 🇬🇧FISIUK 🇮🇳(Friends of India Soc Intl UK) (@FISI_UK) June 25, 2026
प्रवासी भारतीय समुदाय: नया रणनीतिक फ्रंट:
फिसि यूके ने अपने हालिया शोध पत्र “डायस्पोरा: द न्यू स्ट्रेटेजिक फ्रंट” के माध्यम से रेखांकित किया है कि यूके में भारतीय समुदाय अब केवल सांस्कृतिक संरक्षण तक सीमित नहीं है, बल्कि यह द्विपक्षीय कूटनीति, सॉफ्ट पावर और व्यापार में एक सक्रिय ताकत बन चुका है। अकेले वर्ष 2024-25 में, यूके में भारतीय प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) ने 6,000 से अधिक नए रोजगार सृजित किए हैं। चाहे ब्रिटिश संसद में नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA) के बाद पीड़ित हिंदू अल्पसंख्यकों के अधिकारों पर आवाज उठाना हो, या लंदन विश्वविद्यालय में भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) के व्याख्यान में बाधा डालने वाले भारत-विरोधी तत्वों का कड़ा विरोध करना हो; FISI UK लगातार तथ्यों के साथ दुष्प्रचार का मुकाबला कर रहा है। FISI UK के 50 वर्ष पूरे होने पर यह संकल्प और मजबूत होगा कि आने वाले दशकों में भारत-यूके संबंध तकनीक, व्यापार और वैश्विक नेतृत्व की नई इबारत लिखेंगे।
इस अवसर पर (FISI UK) द्वारा विशेष धरोहर और शोध पहल ‘स्मृति’ (SMRITI) का डिजिटल शुभारंभ भी किया जायेगा। इस परियोजना का उद्देश्य यूके में रहने, पढ़ने और काम करने वाले महान भारतीयों (जैसे स्वामी विवेकानंद और विनायक दामोदर सावरकर) के जीवन, संघर्ष और योगदान को सहेजना है। ‘स्मृति यात्रा’ के तहत आगामी समय में स्मृति हेरिटेज मैगज़ीन, हेरिटेज टूर्स और ‘ब्लू प्लैक’ (Blue Plaque) अभियान के जरिए इस साझा सांस्कृतिक विरासत को वैश्विक मंच पर प्रदर्शित किया जाएगा।



